रिपोर्टर: सुरेश भास्कर
बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित हत्या का मामला सामने आने के बाद देशभर में रोष का माहौल बन गया है। इस घटना को लेकर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के एटा जिले में भी विरोध प्रदर्शन किया गया, जहां विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) और बजरंग दल (Bajrang Dal) से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और घटना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
पैदल मार्च निकालकर जताया विरोध:
एटा (Etah) में प्रदर्शनकारियों ने ग्रीन गार्डन से माया पैलेस चौराहे तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं और बांग्लादेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वहां हिंदू समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचारों का विरोध किया। मार्च के दौरान माहौल पूरी तरह से आक्रोशपूर्ण नजर आया और प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में घटना की निंदा की।
झूठे आरोप में हत्या का आरोप:
हिंदूवादी संगठनों का आरोप है कि दीपू चंद्र दास पर पैगंबर के अपमान का झूठा आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उसे भीड़ की हिंसा का शिकार बनाया गया। संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति को उजागर करती हैं और उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल:
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने बांग्लादेश सरकार और वहां की पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बताया। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई की जाती तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुतला दहन कर जताया आक्रोश:
पैदल मार्च के समापन के बाद प्रदर्शनकारियों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौक पर बांग्लादेश के राष्ट्रपति का पुतला दहन किया। इस दौरान कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस बल ने हालात को नियंत्रित बनाए रखा और किसी अप्रिय घटना को टलने में सफलता पाई।
भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग:
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने भारत सरकार से मांग की कि वह बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए ठोस कदम उठाए। साथ ही इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में पहल करने की मांग की गई।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी:
हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों पर रोक नहीं लगी, तो उनका आंदोलन और अधिक व्यापक और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समुदाय की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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