बलिया (Ballia)। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलिया जनपद के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र (Sikandarpur Police Station Area) के काजीपुर गांव (Kajipur Village) में दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस की कथित एकपक्षीय कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। बताया जा रहा है कि मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से लाठी-डंडे चलने लगे और कई लोग घायल हो गए। अब यह मामला पूरे गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मामूली विवाद से बढ़ी भिड़ंत:
जानकारी के अनुसार, गांव के धनेश तुरहा पुत्र अदालत और सुनील तुरहा पुत्र सुरेन्द्र के बीच किसी मामूली बात को लेकर विवाद हो गया। थोड़ी ही देर में दोनों ओर से तनाव बढ़ा और देखते ही देखते लाठी-डंडे चलने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि धनेश तुरहा के घरवाले और कुछ अन्य लोग लाठी, डंडा और ईंट-पत्थर लेकर सुनील के घर पर जा पहुंचे। दोनों पक्षों में हुई इस मारपीट में कई लोग घायल हो गए।
दोनों पक्षों के कई लोग घायल:
घटना में एक पक्ष से धनेश तुरहा, कांती देवी पत्नी गनेश तुरहा और गनेश पुत्र अदालत घायल हुए। वहीं दूसरे पक्ष से माया पुत्री सुरेन्द्र तुरहा, अहिल्या पत्नी सुरेन्द्र तुरहा, धर्मेन्द्र तुरहा पुत्र सुरेन्द्र, रुबी पत्नी हरेराम तुरहा और घूरा पुत्र हरेराम के घायल होने की जानकारी मिली है। दोनों पक्षों के लोगों को इलाज के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
ग्रामीणों में पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी:
सूचना मिलने पर सिकंदरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों के लोगों को थाने ले गई। ग्रामीणों का आरोप है कि उसी रात पुलिस ने एक पक्ष को छोड़ दिया, जबकि दूसरे पक्ष के लोगों को थाने में ही बैठाए रखा। इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए केवल एक पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया, जबकि दूसरे पक्ष की शिकायत तक नहीं सुनी गई।
पीड़ित पक्ष का आरोप:
घायल पक्ष की महिला अहिल्या देवी ने आरोप लगाते हुए कहा कि “हम सोमवार को बाजार में सब्जी बेचने गए थे। वहीं हमारे बेटे सुनील का धनेश से किसी बात पर झगड़ा हो गया। जब हम घर लौटे तो देखा कि धनेश का पूरा परिवार और कुछ अन्य लोग लाठी-डंडा लेकर हमारे घर पर हमला कर रहे हैं। हमने किसी तरह जान बचाई, लेकिन पुलिस हमारी शिकायत दर्ज नहीं कर रही है।”
ग्रामीणों ने पुलिस पर उठाए सवाल:
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस का रवैया निराशाजनक है। उनका कहना है कि “जब दोनों पक्षों के लोग घायल हैं, तो मुकदमा दोनों पर दर्ज होना चाहिए। एक पक्ष को छोड़कर केवल दूसरे के खिलाफ कार्रवाई करना न्याय के विपरीत है।” ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों की शिकायतों पर समान रूप से कार्रवाई की मांग की है।
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