Video: बलिया: धर्मांतरण और लव जिहाद पर सपा सांसद सनातन पाण्डेय का बड़ा बयान

रिपोर्टर: अमित कुमार

उत्तर प्रदेश के बलिया (Ballia) से धर्मांतरण और लव जिहाद को लेकर चल रही बहस के बीच सपा (Samajwadi Party) सांसद सनातन पाण्डेय (Sanatan Pandey) का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में कानून में जो बदलाव किए गए हैं, वे देश की आम सामाजिक मानसिकता के अनुरूप नहीं हैं। उनका कहना है कि भारत में कानून यह मानता है कि 18 वर्ष का व्यक्ति प्रौढ़ और परिपक्व हो जाता है, लेकिन समाज अभी इस स्थिति को पूरी तरह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। इसी विरोधाभास के कारण सामाजिक तनाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

कानून और समाज के बीच अंतर:
सनातन पाण्डेय (Sanatan Pandey) ने कहा कि कानून के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद व्यक्ति को अपने जीवन के निर्णय लेने की आजादी दे दी जाती है। ऐसे में कोई भी युवती अपनी इच्छा से कहीं भी और किसी के साथ भी जा सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि समाज अभी इस विचार को सहज रूप से स्वीकार नहीं कर पाया है। यही वजह है कि जब अलग जाति या समुदाय के बीच संबंध बनते हैं तो उसे संदेह की दृष्टि से देखा जाता है और विवाद खड़ा हो जाता है।

धर्मांतरण को प्रेम से जोड़कर देखने की बात:
सांसद ने कहा कि धर्मांतरण को केवल एक विशेष समुदाय से जोड़कर देखना उचित नहीं है। उनका कहना था कि यदि दो लोगों के बीच प्रेम नहीं होगा तो धर्मांतरण संभव ही नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि हिंदू और मुस्लिम के बीच प्रेम क्यों नहीं हो सकता। धर्मांतरण किसी दबाव या जबरदस्ती से नहीं होता, बल्कि यह आपसी सहमति और भावनात्मक जुड़ाव का परिणाम होता है। इस मुद्दे को नफरत की राजनीति से जोड़कर देखने से समाज में विभाजन बढ़ता है।

नफरत की राजनीति पर सवाल:
सनातन पाण्डेय (Sanatan Pandey) ने कहा कि आज देश में ऐसी राजनीति शुरू हो गई है, जिसमें उन लोगों को भी संदेह की नजर से देखा जा रहा है, जिन्होंने आजादी के बाद इस देश को अपनाया और इसकी मिट्टी को अपना समझा। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मांतरण के नाम पर एक विशेष समाज का शोषण किया जा रहा है। उनका कहना था कि बाल या जबरदस्ती से नहीं, बल्कि प्रेम और सद्भाव से समाज में समरसता लाई जा सकती है।

लव जिहाद पर ऐतिहासिक संदर्भ:
लव जिहाद के मामलों पर विस्तार से बोलते हुए सांसद ने ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे उदाहरण मिलते हैं जब हिंदू युवतियों ने मुस्लिम शासकों से विवाह किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उस समय भी इसे दबाव में हुआ धर्मांतरण माना जाएगा। उन्होंने कहा कि हर मामले को एक ही नजरिए से देखना सही नहीं है और हर घटना की परिस्थितियों को समझना जरूरी है।

आजादी के बाद धर्मांतरण के उदाहरण:
सनातन पाण्डेय (Sanatan Pandey) ने कहा कि आजादी के बाद धर्मांतरण के उदाहरण कांग्रेस (Congress) शासनकाल में भी देखे गए। उन्होंने अपने बचपन का जिक्र करते हुए कहा कि गांवों में ईसाई मिशनरियां सक्रिय थीं और दलित समाज के लोगों को सुविधाएं देकर प्रभावित किया जाता था। उस दौर में कई लोगों ने धर्म परिवर्तन किया। आज भी कुछ गांवों में ऐसी स्थिति देखने को मिलती है, जहां लोग दोनों पक्षों से लाभ उठाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि इन मामलों को केवल मुस्लिम समुदाय से ही क्यों जोड़ा जाता है।

भाजपा पर भी साधा निशाना:
अपने बयान में सांसद ने भाजपा (BJP) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में भाजपा या उसके पुराने संगठन की कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने मौजूदा सरकार से सवाल किया कि क्या उनके संगठन के किसी व्यक्ति ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया था। उनका कहना था कि इतिहास और तथ्यों के आधार पर ही किसी विषय पर चर्चा होनी चाहिए, न कि भावनाओं और नफरत के आधार पर।

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