आस्था या चमत्कार? बलिया में कुछ खास …

रिपोर्टर :अमित कुमार


उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलिया जिले में कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गंगा (Ganga) के तट पर लाखों श्रद्धालु सुबह से ही आस्था की डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़े। इस पावन दिन की महिमा ऐसी कि चारों ओर बस ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय मां गंगे’ के जयघोष गूंज उठे। समाजसेवी और जनप्रतिनिधि भी इस शुभ अवसर पर पीछे नहीं रहे। उन्होंने जगह-जगह सेवा शिविर लगाकर श्रद्धालुओं के बीच सेवा कार्य किया। कहीं भंडारे का आयोजन हुआ तो कहीं दवा और चाय वितरण कर लोगों की सहायता की गई। हर किसी का उद्देश्य यही रहा कि किसी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो।
गंगा स्नान का विशेष महत्व:
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व सनातन संस्कृति में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। बलिया में दूर-दूर से आए श्रद्धालु गंगा तट पर आकर पवित्र जल में स्नान करते हैं और अपने जीवन को धन्य मानते हैं। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु बाबा भृगु (Bhrigu) के दर्शन के लिए जाते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति गंगा में स्नान करने के बाद बाबा भृगु का दर्शन करता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति का माहौल:
गंगा घाटों पर लाखों की भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और भक्ति का भाव झलकता रहा। महिलाएं सिर पर पूजन सामग्री रखे परिवार के साथ गंगा स्नान करने पहुंचीं, वहीं युवा वर्ग भी पूरे उत्साह के साथ भक्ति में डूबा नजर आया। घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखा।
सेवा शिविरों में उमड़ी भीड़:
समाजसेवियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं की सेवा को ही धर्म मानते हुए जगह-जगह सेवा शिविर लगाए। भंडारों में प्रसाद वितरण के साथ-साथ चाय और शरबत का इंतजाम भी किया गया। कई संगठनों ने दवा वितरण केंद्र स्थापित कर बीमार और थके श्रद्धालुओं को राहत पहुंचाई। प्रशासन की ओर से भी सफाई, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की गई थी, जिससे किसी को कोई परेशानी न हो।
बलिया की आस्था और परंपरा:
बलिया की धरती सदा से ही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की धरोहर रही है। कार्तिक पूर्णिमा का मेला यहां की पहचान बन चुका है। यह दिन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक है। लोग मानते हैं कि इस दिन गंगा मैया के दर्शन मात्र से जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।

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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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