रिपोर्टर: अमित कुमार
उत्तर प्रदेश के बलिया (Ballia) जनपद के बांसडीह (Bansdih) ब्लॉक स्थित रूकूनपुरा गांव से सामने आए ग्राम प्रधान विवाद ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर गांव की राजनीति तक हलचल पैदा कर दी है। गांव की महिला प्रधान रूबी देवी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप और फिर उन्हें वापस लेने की घटना ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। मामला तब सुर्खियों में आया जब प्रधान ने जिलाधिकारी को पत्र देकर अपने ही देवर पर प्रधानी संचालन का आरोप लगाया और अगले ही दिन उसी शिकायत से पलट गईं।
प्रधान ने लगाए गंभीर आरोप:
गांव की प्रधान रूबी देवी ने जिलाधिकारी (District Magistrate) को दिए गए पत्र में आरोप लगाया था कि उनके देवर हरेंद्र साहनी ग्राम सचिव से सांठगांठ कर पिछले चार वर्षों से प्रधानी का संचालन कर रहे हैं। उनका कहना था कि उन्हें केवल नाम मात्र की प्रधान बना दिया गया है और वास्तविक अधिकार उनसे छीन लिए गए हैं। गांव में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी तक उन्हें नहीं दी जाती।
विकास कार्यों से दूर रखने का दावा:
प्रधान रूबी देवी का आरोप था कि ग्राम पंचायत में होने वाले किसी भी कार्य में उनकी राय नहीं ली जाती। न तो उन्हें बैठकों में बुलाया जाता है और न ही निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। गांव में कौन सा काम हो रहा है, किस योजना के तहत कार्य चल रहा है, इसकी जानकारी भी उन्हें नहीं दी जाती, जिससे उनकी भूमिका पूरी तरह सीमित हो गई है।
हस्ताक्षर और कागजात को लेकर सवाल:
रूबी देवी ने यह भी बताया कि वर्ष 2021 में प्रधान बनने के बाद शुरुआती दो महीनों तक उनसे कागजात पर हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन उसके बाद उनसे किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं कराए गए। उन्होंने यहां तक कहा कि उन्हें वर्तमान ग्राम सचिव का नाम भी नहीं पता है, जो इस बात को दर्शाता है कि उन्हें पूरी तरह से प्रशासनिक प्रक्रिया से अलग कर दिया गया।
देवर पर कब्जे का आरोप:
प्रधान ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया था कि उनके देवर हरेंद्र साहनी ने पूरी तरह से उनके पद पर कब्जा कर रखा है। उन्हें कहीं साथ नहीं ले जाया जाता और न ही किसी सरकारी या पंचायत स्तर के कार्य में शामिल किया जाता है। इससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गईं और अंततः डीएम कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगानी पड़ी।
डीएम कार्यालय में पहुंची प्रधान:
डीएम कार्यालय पहुंचकर रूबी देवी ने अपनी पीड़ा अधिकारियों के सामने रखी। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो उनका प्रधान होना केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा। डीएम से मुलाकात के बाद उन्होंने बताया कि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि आगे से वही प्रधानी का संचालन करेंगी और उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
अचानक बदला बयान:
हालांकि, पूरे मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब अगले ही दिन गुरुवार को रूबी देवी ने दोबारा जिलाधिकारी को पत्र देकर अपने पहले लगाए गए सभी आरोपों को वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि गांव के कुछ लोगों के बहकावे में आकर उन्होंने गलत आरोप लगा दिए थे और अब वह स्वयं सभी कार्य देख रही हैं।
गांव की राजनीति में हलचल:
प्रधान के इस अचानक बदले रुख ने गांव की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर एक दिन के भीतर ऐसा क्या हुआ कि प्रधान को अपने ही आरोपों से पीछे हटना पड़ा। यह मामला गांव में आपसी राजनीति और दबाव की ओर भी इशारा कर रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो:
इस पूरे प्रकरण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद मामला केवल प्रशासनिक दायरे तक सीमित न रहकर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। गांव के लोग इस वीडियो को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, जिससे माहौल और भी गरमा गया है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर:
प्रधान के आरोप और फिर उनके खंडन के बाद प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को किस तरह से देखता है और ग्राम पंचायत में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।
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