रिपोर्टर: अमित कुमार
बलिया (Ballia) जिले में गंगा घाट (Ganga Ghat) की नीलामी को लेकर मछुआरों के बीच भारी आक्रोश फैल गया है। स्थानीय स्तर पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि मछुआरे इस नीलामी को अपने अस्तित्व और आजीविका पर खतरा मान रहे हैं। इस विवाद को गंभीर स्वर तब मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह (Surendra Singh) के नेतृत्व में सैकड़ों निषाद समाज के लोग एकजुट होकर जिला प्रशासन तक पहुंचे और जिला अधिकारी (DM) के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को पत्र भेजकर नीलामी को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की।
नीलामी के विरोध का कारण:
मछुआरों ने आरोप लगाया कि जिन्होंने गंगा घाट का टेंडर प्राप्त किया है, वे उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। मछुआरों का कहना है कि टेंडर धारकों की ओर से उनके साथ मारपीट की जा रही है और उन्हें घाट से जबरन भगाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कथित उत्पीड़न ने मछुआरों की चिंता और गुस्से को और बढ़ा दिया है। स्थानीय समुदाय का मानना है कि यह नीलामी पारंपरिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है, जिससे उनकी रोज़गार व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
BJP उपाध्यक्ष के नेतृत्व में विरोध:
सुरेंद्र सिंह (Surendra Singh) के नेतृत्व में दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में निषाद समाज के लोग एक साथ डीएम कार्यालय पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि गंगा घाट पर सदियों से मछुआरे निर्भर रहे हैं और इस नीलामी के बाद बाहरी लोगों को अधिकार मिलने से मछुआरा समाज की आजीविका संकट में पड़ गई है। विरोध जताते हुए उन्होंने मांग की कि नीलामी को रद्द करके स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
DM को सौंपा गया पत्र:
प्रदर्शन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण से अवगत कराया। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता है, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) से मांग की है कि निषाद समाज की आजीविका और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस नीलामी को तत्काल रोका जाए।
मछुआरों की पीड़ा और सुरक्षा की चिंता:
मछुआरों ने बताया कि टेंडर लेने वाले लोग उन्हें डरा-धमका रहे हैं, जिससे वे घाट पर काम करने तक से डर महसूस कर रहे हैं। कई मछुआरों ने दावा किया कि उनके साथ शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार भी किया गया। इस तरह की घटनाओं ने स्थानीय समुदाय में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
स्थानीय स्तर पर बढ़ी हलचल:
नीलामी को लेकर उठे विरोध ने प्रशासन को भी सक्रिय कर दिया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में यह चर्चा भी तेज़ हो गई है कि क्या नीलामी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संपन्न हुई थी। वहीं, निषाद समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है, तो संघर्ष का दायरा और बड़ा होगा।
जांच और हस्तक्षेप की मांग:
प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि नीलामी की संपूर्ण प्रक्रिया की जांच की जाए और साथ ही टेंडर धारकों की कथित मनमानी पर रोक लगाई जाए। विरोध करने वालों ने यह भी कहा कि गंगा घाट पीढ़ियों से उनके जीवन का आधार रहा है, जिसे अचानक बदलना न्यायसंगत नहीं है।
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