उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलिया (Ballia) में एक सप्ताह के भीतर दिव्यांग बच्ची से जुड़ा दूसरा मामला सामने आया है। सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के महुलानपार गांव की 18 वर्षीय ज्योति दोनों पैरों से दिव्यांग हैं और एक हाथ से वजन उठाने में भी असमर्थ हैं। पढ़ने की इच्छा होने के बावजूद आर्थिक तंगी और संसाधनों के अभाव में उन्हें करीब तीन साल पहले पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। ज्योति का वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले का संज्ञान लिया और जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद 24 घंटे के भीतर जिला प्रशासन ज्योति के घर पहुंचा। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने ज्योति को ट्राईसाइकिल, टाफी, पीएमश्री आवास और दिव्यांग शौचालय देने के साथ नौवीं कक्षा में सरकारी विद्यालय में प्रवेश दिलाने का आश्वासन दिया।
गरीबी के चलते तीन साल पहले छूटी पढ़ाई:
महुलानपार गांव की रहने वाली ज्योति दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। इसके अलावा वह एक हाथ से वजन उठाने में भी सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की और किसी तरह आठवीं कक्षा तक शिक्षा हासिल की। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण करीब तीन साल पहले उनकी पढ़ाई छूट गई।
पढ़ाई छोड़ने के बाद संसाधनों के अभाव में ज्योति को घर पर ही रहना पड़ा। बताया गया कि ज्योति पढ़-लिखकर समाज में आगे बढ़ना चाहती हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति उनके इस सपने के रास्ते में बड़ी परेशानी बनी हुई थी।
वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय:
ज्योति से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से सामने आया। वीडियो के मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद वहां से मामले का संज्ञान लिया गया और जल्द कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए। इसके बाद जिला प्रशासन ने भी तत्काल कदम उठाया।
निर्देश के 24 घंटे के भीतर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ज्योति के घर पहुंचे। प्रशासनिक टीम के पहुंचने के बाद परिवार को उम्मीद जगी कि अब ज्योति की पढ़ाई दोबारा शुरू हो सकेगी और उन्हें आवागमन के लिए जरूरी साधन भी मिल पाएगा।
जिलाधिकारी ने दिए सहायता के संसाधन:
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने ज्योति को ट्राईसाइकिल देने के साथ टाफी, पीएमश्री आवास और दिव्यांग शौचालय दिए। इसके अलावा ज्योति को नौवीं कक्षा में सरकारी विद्यालय में पढ़ाई के लिए प्रवेश दिलाने का आश्वासन भी दिया गया।
ज्योति को जब दोबारा विद्यालय जाने की उम्मीद मिली तो उनके चेहरे पर खुशी दिखाई दी। पढ़ाई की इच्छा रखने वाली ज्योति के लिए विद्यालय में प्रवेश का आश्वासन उनके रुके हुए शिक्षा के सफर को फिर से शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
पिता गुलाब ने बताई मिली मदद:
ज्योति के पिता गुलाब ने बताया कि प्रशासन की ओर से ट्राईसाइकिल, पीएमश्री आवास और दिव्यांग शौचालय देने के साथ पढ़ाई के लिए प्रवेश कराने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि ज्योति को टाफी भी दी गई है।
परिवार के मुताबिक, ज्योति की पढ़ाई काफी समय से रुकी हुई थी। अब प्रशासन की ओर से विद्यालय में प्रवेश कराने का आश्वासन मिलने के बाद ज्योति के दोबारा पढ़ाई शुरू करने की उम्मीद बनी है।
एक सप्ताह में सामने आया दूसरा मामला:
बलिया में यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब करीब एक सप्ताह पहले मनियर ब्लॉक के रानीपुर में सात वर्षीय रागिनी से जुड़ा मामला सामने आया था। रागिनी ने छह माह की उम्र में एक सड़क हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था। उसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया था।
इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से रागिनी के घर पहुंचकर सहायता की गई थी। अब महुलानपार गांव की ज्योति से जुड़ा मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने उनके घर पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराई है।
जिलाधिकारी ने कैमरे पर बोलने से किया इनकार:
ज्योति के मामले को लेकर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह से बातचीत करने की कोशिश की गई। हालांकि उन्होंने कैमरे पर इस मामले में बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर कुछ नहीं बोलेंगे।
फिलहाल ज्योति को ट्राईसाइकिल और अन्य सहायता मिलने के साथ नौवीं कक्षा में सरकारी विद्यालय में प्रवेश दिलाने का आश्वासन दिया गया है। ज्योति की खुशी का कारण यही है कि अब उन्हें फिर से विद्यालय जाकर पढ़ाई करने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
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रिपोर्टर: अमित कुमार
