रिपोर्ट: अमित कुमार
बलिया (Ballia) जिले के बड़सड़ी जागीर (Badsari Jagir) गांव में पिछले तीन महीने से पानी भरने के कारण स्थानीय लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। 300 आबादी वाले इस गांव की राजभर (Rajbhar) बस्ती में पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि दर्जनों नई नवेली दुल्हनों (Newly Married Women) ने अपने ससुराल (In-laws) छोड़कर अपने पिता के पास मायके (Maternal Home) लौटना शुरू कर दिया।
पारिवारिक रिश्तों पर असर:
स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी में डूबे गांव से बाहर निकलते समय महिलाओं, बच्चियों और बुजुर्गों को अपने कपड़े ऊपर उठाकर चलना पड़ता है। इस शर्मिंदगी और लोक-लाज (Social Shame) के कारण कई नवविवाहित महिलाएं अपने पति के घर से मायके लौट गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या अब उनके पारिवारिक जीवन पर गंभीर असर डाल रही है।
गांव वालों की गुहार:
राजभर बस्ती के लोगों ने जिलाप्रशासन (District Administration) से अपने गांव को गोद लेने (Adopt the Village) की मांग की है। ग्रामीणों का दर्द भरा बयान है, “साहब, मेरे गाँव को गोद ले लीजिए।” उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने जनप्रतिनिधियों (Public Representatives), चाहे वह ग्राम प्रधान (Gram Pradhan), विधायक (MLA) या राजभर नेता और मंत्री ओमप्रकाश राजभर (Omprakash Rajbhar) पर भरोसा नहीं है। कई बार पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब वे चाहते हैं कि उनका गांव सरकारी तौर पर सहायता प्राप्त करे।
ग्रामीणों का संघर्ष और प्रयास:
गांव में जमा पानी निकालने के लिए ग्रामीणों ने घर-घर से चंदा (Donation) इकट्ठा किया और डीजल इंजन (Diesel Engine) की मदद से पानी बाहर निकालने की कोशिश की। ग्रामीणों का कहना है कि दबंगों और बड़े लोगों (Influential Persons) ने अपने घरों को सुरक्षित रखने के लिए रास्ते रोक दिए। इस वजह से उनके घर तो सुरक्षित रह गए, लेकिन राजभर बस्ती पूरी तरह डूब गई।
स्थानीय हालात और पीड़ा:
बड़सड़ी जागीर (Badsari Jagir) की तस्वीरें बांसडीह (Bansdih) तहसील में पिछले तीन पीढ़ियों से इस समस्या का सामना कर रहे ग्रामीणों की पीड़ा दिखाती हैं। पानी में डूबा गांव, घरों और खेतों की तबाही, नवविवाहित महिलाओं का मायके लौटना और प्रशासनिक लापरवाही इस पूरे इलाके की गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप नहीं करता है, तो उनकी जिंदगी और पारिवारिक संरचना पर और भी गंभीर असर पड़ेगा। उनका दावा है कि गांव को सरकारी मदद और सुरक्षा मिले, तभी यह लंबी अवधि की समस्या हल हो सकती है।
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Disclaimer: यह खबर स्थानीय संवादाता द्वारा दी गई सूचना पर आधारित है, जिसकी समस्त जिम्मेदारी स्थानीय संवादाता की है।