February 24, 2026

किसानों को 6000 देकर सरकार जता रही है एहसान: कमलेश

संवाददाता: सुनील सिंह


बलिया। सियासत इस तरह आवाम पर एहसान कर रही है ।आंखे छीन कर चश्मे दान कर रही है। यह व्यंग जिला बलिया कोआपरेटिव बैंक के पूर्व जिला अध्यक्ष व कांग्रेस पार्टी के प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य ,पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के तत्कालीन प्रतिनिधि मनियर निवासी कमलेश कुमार सिंह का है ‌। सिंह ने अपने आवास पर पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार एक साल में छः हजार रुपए देकर किसानों पर एहसान जता रही है वह बाहबाही लूट रही है । यह वैसे ही है जैसे आंखे छीन कर चश्मा दान देना । साल में कम से कम किसान दो फसल उगाता है । किसान एक फसल में मिर्च की खेती करें तो करीब एक बीघे में वह कम से कम आठ हजार रूपए कमा लेगा । अगर सरकार वास्तव में किसान की आमदनी दूगुनी करना चाहती है तो उसे सोलह हजार रुपए एक साल में किसान को देना चाहिए। सिंह ने कहा किसान बिल वापस होनी चाहिए। सरकार कह रही है कि किसान कहीं भी अपना अनाज बेंच सकता है‌ । जो किसान 4 किलोमीटर की दूरी तय करके क्रय केंद्र पर अपनी फसल नहीं ले जा पा रहा है तो वह 5 ट्रक 10 ट्रक करके अपनी फसल को पटना बनारस कैसे ले जाकर बेंच सकता है ? यह निर्धारित होना चाहिए कि वह कहीं भी अनाज बेंचे लेकिन निर्धारित रेट से उसकी कीमत कम न लगाई जाय। इस बिल के कारण आने वाले दिनों में ट्रैक्टर, पंपिंग सेट, शादी विवाह व अन्य कृषि कार्य हेतु अगर किसान लोन लेना चाहे तो उसे लोन नहीं मिल पाएगा । शहर में घर हो तो उस पर लोन मिलता है । देहात में नहीं मिलता। लोन लेने के लिए किसान को अपने खेत के खसरा खतौनी का इंतखाप देना पड़ता है। किसान बिल के अनुसार किसान कौन सा खेती करेगा? यह तय किसान नहीं करेगा बल्कि टाटा, बिड़ला, धीरूभाई अंबानी के लड़के मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, वह अडानी ग्रुप तय करेगा । जिस प्रकार से पूंजीपति अपना सामान तैयार करते हैं और उसका रेट वह निर्धारित करते हैं‌। जैसे विल्स कंपनी का सिगरेट या पारले जी बिस्कुट का रेट अगर निर्धारित है तो जिस रेट में वह बलिया में बिकता है उसी रेट में वह मुंबई में भी बिकता है ।इसी प्रकार से किसानों की फसल का रेट भी निर्धारित होना चाहिए और यह किसान तय करेगा न कि सरकार ।जब उनसे यह पूछा गया कि सरकार कह रही है कि किसान आंदोलन नहीं कर रहे हैं बल्कि विरोधी पक्ष किसान बिल के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं ।इस पर उन्होंने कहा कि यह किसानों के आंदोलन को तोड़ने के लिए सरकार के तरफ से कुचक्र चलाया जा रहा है।।

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