महिला के शव से आंखें निकालने के मामले में सीएमओ निलंबित

उत्तर प्रदेश के बदायूं में पोस्टमार्टम के दौरान महिला के शव की आंखें निकालने के मामले में शुक्रवार को सीएमओ डॉ. प्रदीप कुमार वार्ष्णेय को निलंबित कर दिया गया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर यह कार्रवाई हुई है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की बहुत बड़ी लापरवाही सामने आई है।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने महिला के परिवार वालों से पूरा मामला छिपाया था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी आंखें गायब होने का जिक्र नहीं किया गया था। इस पर मृतका के भाई राजकुमार ने डॉक्टरों समेत पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दोनों डॉक्टरों को जेल भेज दिया था। 

यह मामला शासन तक पहुंच गया है। वहां से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई थी। इस संबंध में शुक्रवार को शासन स्तर से बड़ी कार्रवाई हुई। सीएमओ डॉ. प्रदीप कुमार वार्ष्णेय को निलंबित कर दिया गया। उन्हें महानिदेशक कार्यालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। 

मुजरिया थाना क्षेत्र के ग्राम रसूला निवासी पूजा (20) ने फंदे से लटककर जान दे दी थी। सोमवार दोपहर उसके शव का पोस्टमार्टम कादरचौक सीएचसी के डॉ. मोहम्मद उवैस और जिला अस्पताल के क्षय रोग विभाग में तैनात डॉ. मोहम्मद आरिफ हुसैन के पैनल ने किया था। पोस्टमार्टम के बाद मायके वाले जब पूजा का शव लेकर घर पहुंचे। जब बॉडीबैग खोला गया तो पूजा के आंखें नहीं थीं। मायके वालों ने पोस्टमार्टम के दौरान आंखें निकाले जाने का आरोप लगाकर डीएम को प्रार्थना पत्र दिया था। इसके बाद दोबारा पोस्टमार्टम और जांच कराई गई।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने घटना पर नाराजगी जाहिर की। बदायूं के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रदीप वाष्र्णेय को पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाह पाया। जांचोपरांत डॉ. प्रदीप को निलंबित करते हुए लखनऊ से सम्बद्ध कर दिया गया है। महिला के शव का प्रथम बार पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों एवं अन्य कार्मिकों का विवरण जुटाने के लिए बरेली के अपर निदेशक को निर्देशित किया गया है।

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