बाबर के नाम पर बाबरी मस्जिद या कोई भी मस्जिद बनाने पर रोक की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आज उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें मुगल बादशाह बाबर (Babar) के नाम पर किसी भी मस्जिद (Mosque) का निर्माण न करने की मांग की गई थी। जस्टिस विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath) और जस्टिस संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) की पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता (Petitioner) के वकील ने तर्क दिया कि बाबर के नाम पर देश में किसी भी मस्जिद का निर्माण नहीं होना चाहिए और बाबर को आक्रांता (Invader) बताया।

याचिकाकर्ता की दलील:
कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि बाबर ने हिंदुओं को गुलाम कहा और ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई कि अधिकारियों को आदेश दिया जाए कि बाबर के नाम पर किसी भी मस्जिद के निर्माण पर रोक लगे।

पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद विवाद:
हाल ही में टीएमसी (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद (Murshidabad) में बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि वे यहां बाबरी मस्जिद बनाएंगे। इस घटना ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को और जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट का पिछला फैसला:
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण की अनुमति दी थी। अपने फैसले में कोर्ट ने 1992 में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के विध्वंस को कानून के शासन का उल्लंघन बताया था। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि मुस्लिम पक्ष (Muslim Side) को अयोध्या के किसी प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए दी जाए।

सुनवाई से इनकार का कारण:
कोर्ट ने आज स्पष्ट किया कि याचिका में जो मांग की गई है, वह पहले से ही मामले में विचाराधीन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ऐतिहासिक विवाद और अतीत की घटनाओं पर आदेश देने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि कानून के अनुसार किसी भी धर्मस्थल निर्माण पर रोक तभी लगाई जा सकती है जब कोर्ट पहले से आदेश दे।

विशेष टिप्पणी:
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में बाबर के ऐतिहासिक कृत्यों को भी उद्धृत किया। उन्होंने कहा कि बाबर के शासनकाल में कई मंदिरों को तोड़ा गया और मुस्लिम वर्चस्व (Muslim Supremacy) स्थापित किया गया। कोर्ट ने इस दलील को सुना लेकिन याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मांग न्यायालय के दायरे से बाहर है।

समाज और राजनीति पर असर:
बाबर के नाम पर मस्जिद निर्माण का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक विवादों के आधार पर किसी धार्मिक स्थल निर्माण पर रोक लगाना उचित नहीं है। इस फैसले से देशभर में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ सामने आ सकती हैं।

निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक विवादों और धार्मिक स्थल निर्माण से जुड़े मामलों में स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान करता है। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि कानून के अनुसार ही किसी भी विवादित निर्माण या विरोध को रोका या अनुमति दी जा सकती है।

Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com


#बाबर #मस्जिद #याचिका #सुप्रीम #कोर्ट #नई #दिल्ली #राम #मंदिर #हुमायूं #कबीर #मुर्शिदाबाद #विरोध

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading