



शैलेन्द्र शर्मा
आजमगढ़ में शुक्रवार की शाम को नदियों व पोखरों के घाट पर अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया गया। इस दौरान छठ घाटों पर हर आम व खास सबों ने छठी मइया की श्रद्धापूर्वक पूजा की। Corona को लेकर प्रशासन की तरफ से तमाम गाइडलाइन बनाई गई थी व खुद सीएम की तरफ से लोगों से घर व आसपास ही मनाने की अपील की गई थी लेकिन इसका आंशिक असर ही रहा। हालांकि इस बार कई महिलाओं ने घर पर ही पानी किसी बड़े बर्तन में रख कर पूजन अर्चन कर अर्घ्य दिया। कुल मिला कर छठ मईया हम सबकी अरज सुन रही हैं। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में चहल पहल थी। घाघरा, तमसा समेत सभी छोटी नदियों, पोखर, तालाब के साथ घरों व मोहल्लों में विशेष रूप से तैयार जलकुंड में अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्ध्य अर्पित करने के साथ ही लोकपर्व छठ का मुख्य अनुष्ठान आरंभ हो चुका है। अब शनिवार को प्रात:कालीन अर्घ्य के साथ यह महापर्व संपन्न हो जाएगा। भले ही यह पर्व बिहार मुख्य रूप से मनाया जाता है लेकिन आजमगढ़ के शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में जिस तरह से पर्व की धूम है यह माना जा सकता है कि इसने महापर्व का रूप ले लिया है। घाटों पर अर्ध्य के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा को देखते हुए अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। गली मोहल्लों में छठ गीत गूंज रहे हैं। हर जगह छठ को लेकर उत्साह देखते ही बन रहा है। टोला मोहल्ला के लोग व सगे संबंधी जुटे। गीत गूंजे सेईं ले चरण तोहार ऐ छठी मइया, सुनी लेहु अरज हमार। पूजा के बाद व्रतियों ने प्रसाद के रूप में रोटी एवं खीर ग्रहण किया। विभिन्न घाटों पर महिलाएं पैदल ही समूह में छठी माई के गीत गाते हुए आ रही थीं। समूह में छठव्रतियों के साथ साथ परिवार के अन्य लोग भी शामिल थे। वहीं मन्नत पूरी होने पर कई व्रती महिलाएं सड़क पर शाष्टांग लेट कर पहुँची।