‘भाजपा के लोगों का तकिया कलाम बन गया है कि मुसलमानों में बाबर का डीएनए है। अगर मुसलमान बाबर की औलाद हैं तो तुम गद्दार राणा सांगा की औलाद हो…।”
ये बयान गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान बीते शुक्रवार को रामजी लाल सुमन ने दिया था। सपा के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद रामजी लाल सुमन के राज्यसभा में राणा सांगा पर दिए बयान के बाद सियासत गर्म है। रविवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मैं अपने बयान पर कायम हूं। बाबर स्वेच्छा से हिंदुस्तान नहीं आया था। उसे राणा ने बुलाया था। इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता।

रविवार को रामजी लाल सुमन आगरा के संजय प्लेस स्थित आवास पर मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं बाबर आक्रांता था, लेकिन उसे लाने वाला कौन था। वो अपनी मर्जी से नहीं आया था। इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा ने उसे बुलाया था। उन्होंने यह भी कहा कि मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
क्षत्रिय समाज में आक्रोश:
खबरों के अनुसार राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के मेवाड़ के सम्राट राणा सांगा को लेकर दिए विवादित बयान से क्षत्रिय समाज में रोष है। समाज के लोगों ने रविवार को सपा सांसद के खिलाफ कासगंज, एटा, आगरा, मैनपुरी और अलीगढ़ समेत प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन कर उनके पुतले फूंके। राज्यसभा के सभापति से उन्हें निलंबित करने की मांग उठाई। कासगंज और सोरोंजी में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने जुलूस निकालकर सांसद के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।

51 हज़ार का इनाम:
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मैनपुरी में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व जिलाध्यक्ष सुमित चौहान ने सपा सांसद रामजीलाल सुमन को लेकर फेसबुक पर पोस्ट किया कि जो रामजीलाल सुमन को जूता मारेगा उसे 51 हजार रुपये का ईनाम दिया जाएगा। बहस यहीं नहीं थमी हिंदूवादी संगठनों के अन्य लोगों ने भी पांच-पांच हजार की घोषणा कर दी।
सनातन के खिलाफ साजिश रचती है सपा :
पूर्व मंत्री व भाजपा नेता सुरेश राणा ने कहा कि

भारत के गौरवशाली इतिहास और सनातन को बदनाम करने की साजिश रचना सपा की फितरत रही है। आक्रमणकारी और राष्ट्रविरोधियों को ही सपा अपना आदर्श मानती है। राणा सांगा जैसे वीर शिरोमणि और हिंदू हृदय सम्राट के खिलाफ सपा सांसद की अमर्यादित टिप्पणी निंदनीय है। सनातनी इतिहास में उनकी छाप अमिट है। उनका पूरा जीवन धर्म व राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है। सपा राजनीतिक लाभ के लिए भारत का गौरवशाली इतिहास रचने वाले वीर योद्धाओं को अपमानित करने का अभियान चला रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
विश्व हिंदू परिषद ने सन् 1508 से 1528 तक मेवाड़ पर शासन करने वाले राणा सांगा पर समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन की टिप्पणी को विहिप ने शर्मनाक बताया। साथ ही कहा कि राणा सांगा को देशद्रोही बताने के लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी सांसद का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने बस इतिहास का एक पन्ना खोला है। रामजी लाल सुमन ने जो कहा, वो इसलिए कहा क्योंकि हर कोई इतिहास के पन्ने पलट रहा है। भाजपा के नेता औरंगजेब पर बहस करना चाहते हैं तो रामजी लाल सुमन ने भी इतिहास का वो पन्ना पलट दिया, जहां ऐसा कुछ लिखा हुआ था। हमने 100-200 साल पहले का इतिहास नहीं लिखा। मैं भाजपा से अनुरोध करता हूं कि इतिहास के पन्ने न पलटे क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो लोग ये भी याद रखेंगे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का तिलक हाथ से नहीं बल्कि बाएं पैर के अंगूठे से किया गया था। क्या आज भाजपा इसकी आलोचना करेगी?
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