अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने 2 अप्रैल को अपने महत्वाकांक्षी ‘आर्टेमिस-2’ मिशन की सफल लॉन्चिंग की। सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) रॉकेट के जरिए ‘ओरियन स्पेसक्राफ्ट’ (Orion Spacecraft) में सवार चार अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की ओर रवाना किया गया। यह ऐतिहासिक लॉन्च केनेडी स्पेस सेंटर से किया गया। साल 1972 में ‘अपोलो-17’ (Apollo 17) के बाद यह पहला मौका है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा से आगे बढ़कर चंद्रमा के करीब पहुंचेगा।
लॉन्च से पहले तकनीकी चुनौती:
उड़ान से करीब एक घंटे पहले ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ (Launch Abort System) में तकनीकी दिक्कत सामने आई, जिससे मिशन पर अस्थायी खतरा मंडराने लगा। यह सिस्टम आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। हालांकि इंजीनियरों ने तेजी से समस्या का समाधान किया और काउंटडाउन को 10 मिनट पर रोककर सभी जरूरी सिस्टम्स की जांच की गई। सभी विभागों से ‘ओके’ मिलने के बाद मिशन को आगे बढ़ाया गया और रॉकेट सफलतापूर्वक रवाना हुआ।
संपर्क में आई अस्थायी रुकावट:
उड़ान के लगभग 51 मिनट बाद सैटेलाइट हैंडओवर के दौरान ओरियन कैप्सूल का संपर्क कुछ समय के लिए बाधित हो गया। मिशन कंट्रोल की आवाज क्रू तक पहुंच रही थी, लेकिन क्रू का जवाब नीचे नहीं आ पा रहा था। बाद में इस तकनीकी समस्या को ठीक कर लिया गया और सिस्टम सामान्य रूप से कार्य करने लगा।
मैनुअल कंट्रोल की पहली टेस्ट ड्राइव:
मिशन के दौरान पायलट विक्टर ग्लोवर ने करीब एक घंटे तक ओरियन कैप्सूल को मैनुअली कंट्रोल किया। यह पहली बार था जब इस स्पेसक्राफ्ट को इस तरह संचालित किया गया। इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने मिशन कंट्रोल के साथ संवाद करते हुए अपने अनुभव साझा किए और सफल उड़ान के लिए आभार भी जताया।
मिशन का उद्देश्य और आगे की योजना:
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंतरिक्ष में मानव जीवन के लिए यह कितना सुरक्षित है। यह मिशन 10 दिनों का होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर पृथ्वी पर वापस लौटेंगे। इस दौरान वे लगभग 6,85,000 मील (करीब 11 लाख किलोमीटर) की दूरी तय करेंगे।
अंतरिक्ष यात्रियों की टीम:
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें रीड वाइजमैन, क्रिस्टीना कोच, जेरेमी हैनसन और विक्टर ग्लोवर शामिल हैं। यह मिशन खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें पहली बार कोई महिला चांद के करीब पहुंचेगी और एक गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री भी इस यात्रा का हिस्सा है।
ओरियन स्पेसक्राफ्ट की खासियतें:
‘ओरियन स्पेसक्राफ्ट’ आधुनिक तकनीक से लैस है, जिसमें पुराने ‘अपोलो’ मिशन की तुलना में अधिक जगह, उन्नत कंप्यूटर सिस्टम और सोलर पैनल शामिल हैं। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के आराम के लिए झूलों जैसी व्यवस्था, आधुनिक टॉयलेट सिस्टम और व्यायाम उपकरण भी मौजूद हैं। इसके अलावा, इसमें छह खिड़कियां दी गई हैं, जो अंतरिक्ष के अद्भुत दृश्य को और खास बनाती हैं।
भविष्य के मिशनों की दिशा:
हालांकि इस मिशन में चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग नहीं होगी, लेकिन यह भविष्य में मानव को चांद पर बसाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मिशन से मिले अनुभव और आंकड़े आने वाले अभियानों के लिए आधार तैयार करेंगे।
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