प्रदेश में परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति और खेल से जोड़ने के उद्देश्य से एक व्यापक स्तर पर वार्षिकोत्सव और खेल उत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस पहल के तहत राज्य सरकार ने ₹19.80 करोड़ की धनराशि जारी की है। जनवरी के अंत तक इन आयोजनों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिकतम संख्या में छात्र, अभिभावक और समुदाय इससे जुड़ सके।
लखनऊ में जारी जानकारी के अनुसार, इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के एक लाख 32 हजार से अधिक परिषदीय विद्यालयों और 746 केजीबीवी में वार्षिकोत्सव और खेल उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह अब तक के सबसे बड़े शैक्षिक-सांस्कृतिक अभियानों में से एक माना जा रहा है, जिसका सीधा उद्देश्य विद्यालयों को समुदाय के सक्रिय केंद्र के रूप में विकसित करना है।
वार्षिकोत्सव और खेल उत्सव की व्यापक तैयारी:
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के निर्देशन में यह कार्यक्रम विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इसमें एक लाख 31 हजार से अधिक परिषदीय विद्यालय और सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय शामिल हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों से बच्चों के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और टीम भावना का विकास होगा, जो उनके शैक्षिक और सामाजिक जीवन दोनों के लिए आवश्यक है।
नामांकन और उपस्थिति बढ़ाने पर फोकस:
इन आयोजनों का एक प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों में नामांकन, नियमित उपस्थिति और ठहराव में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना है। संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब शिक्षा को खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ा जाता है, तब बच्चों की विद्यालय के प्रति रुचि बढ़ती है और ड्रॉपआउट की समस्या कम होती है।
सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों को मिलेगा मंच:
वार्षिकोत्सव के दौरान विद्यार्थियों की रचनात्मक और बौद्धिक प्रतिभा को सामने लाने के लिए नाटक, कहानी लेखन, भाषण, वाद-विवाद, चित्रकला, रंगोली और पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी अभिव्यक्ति के अवसर मिलेंगे और उनमें आत्मविश्वास का विकास होगा।
शिक्षा और सामाजिक सरोकार होंगे मुख्य विषय:
कार्यक्रमों के दौरान शिक्षा का महत्व, नियमित उपस्थिति और आउट ऑफ स्कूल बच्चों को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ने जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही उच्च प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों द्वारा ‘लर्निंग बाय डूइंग’ के तहत तैयार की गई शैक्षिक सामग्री की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिससे अभिभावक और समुदाय बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को समझ सकें।
खेल उत्सव से बढ़ेगा शारीरिक और मानसिक विकास:
खेल उत्सव के अंतर्गत कक्षा 3 से 5 तक के बच्चों के लिए 50 और 100 मीटर दौड़, जबकि कक्षा 5 से 8 तक के बच्चों के लिए 100 और 200 मीटर दौड़ आयोजित की जाएगी। इसके अलावा सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए 4×100 मीटर रिले रेस भी कराई जाएगी। जहां संभव होगा, वहां अभिभावकों की दौड़ या रिले रेस आयोजित कर उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को मिलेगा सम्मान:
सांस्कृतिक और खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक कक्षा में सर्वाधिक उपस्थिति वाले बच्चों को विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा, ताकि नियमित विद्यालय आने के प्रति बच्चों को प्रोत्साहित किया जा सके।
समुदाय को जोड़ने की विशेष पहल:
इन आयोजनों को सफल बनाने के लिए प्रत्येक छात्र के अभिभावक को व्यक्तिगत आमंत्रण दिया जाएगा। ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, पूर्व छात्र और स्थानीय गणमान्य नागरिकों की सहभागिता से विद्यालय और समाज के बीच संवाद और विश्वास को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि परिषदीय विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र न रहकर सामाजिक सहभागिता के केंद्र बनें।
शिक्षा को उत्सव से जोड़ने का प्रयास:
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि वार्षिकोत्सव और खेल उत्सव बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और टीम भावना विकसित करेंगे। इससे परिषदीय विद्यालयों के प्रति समाज का विश्वास भी बढ़ेगा और शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी।
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