रिपोर्टर: जेड ए खान
डिजिटल डेस्क, अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (Aligarh Muslim University) से जुड़ा एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने शैक्षणिक जगत में हलचल मचा दी है। राजनीति विज्ञान विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर रचना कौशल ने आरोप लगाया है कि वे पिछले 27 वर्षों से लगातार मानसिक और पेशेवर उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। उनका कहना है कि वर्ष 1998 से केवल हिंदू होने के कारण उन्हें भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ रहा है। इस संबंध में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मानसिक और पेशेवर उत्पीड़न के गंभीर आरोप:
प्रोफेसर रचना कौशल ने अपनी शिकायत में कहा है कि विभागाध्यक्ष और डीन प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी द्वारा उनके साथ बार-बार साम्प्रदायिक टिप्पणियां की गईं। आरोप है कि इन टिप्पणियों का उद्देश्य उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और पेशेवर रूप से कमजोर करना था। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से उन्हें विभागीय गतिविधियों में हाशिये पर रखा गया और उनके अधिकारों का दुरुपयोग किया गया।
ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेज सौंपे:
प्रोफेसर कौशल ने विश्वविद्यालय के कुलपति को सौंपे गए शिकायती पत्र के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग, उसकी लिखित ट्रांसक्रिप्ट और अन्य संबंधित दस्तावेज भी जमा किए हैं। उनका कहना है कि ये साक्ष्य उनके आरोपों की पुष्टि करते हैं और जांच के दौरान इन्हें गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करना नहीं, बल्कि न्याय पाना है।
गर्भावस्था के दौरान दबाव का आरोप:
शिकायत में एक बेहद संवेदनशील आरोप भी शामिल है। प्रोफेसर कौशल का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान भी उन पर अत्यधिक काम का दबाव बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि इस मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण उनके जुड़वां बच्चों का मिसकैरेज हो गया। उनका आरोप है कि उस समय भी मानवीय संवेदनाएं नहीं दिखाई गईं और उन्हें राहत देने के बजाय अतिरिक्त जिम्मेदारियां दी जाती रहीं।
बैठकों से बाहर रखने का दावा:
प्रोफेसर रचना कौशल ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें जानबूझकर बोर्ड ऑफ स्टडीज़ जैसी महत्वपूर्ण बैठकों से बाहर रखा गया। उनका कहना है कि वरिष्ठता के बावजूद उन्हें विभागीय निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां अन्य लोगों को सौंप दी गईं। इससे न केवल उनके सम्मान को ठेस पहुंची, बल्कि उनके शैक्षणिक करियर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
निष्पक्ष जांच और पद से हटाने की मांग:
इस पूरे मामले को लेकर प्रोफेसर कौशल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि जांच पूरी होने तक संबंधित डीन को पद से हटाया जाना चाहिए, ताकि किसी तरह का दबाव या प्रभाव जांच प्रक्रिया पर न पड़े। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
विश्वविद्यालय की छवि पर सवाल:
यह मामला सामने आने के बाद (Aligarh Muslim University) की आंतरिक कार्यप्रणाली और कार्यस्थल पर समानता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रोफेसर कौशल का कहना है कि वे केवल अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा चाहती हैं और उन्हें उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेगा।
आगे की कार्रवाई पर नजर:
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह मामला न केवल एक शिक्षक के व्यक्तिगत संघर्ष से जुड़ा है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में समानता, सम्मान और निष्पक्षता जैसे मूल्यों से भी संबंधित है।
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