फिल्मी स्टाइल में हुए थे पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार, अब गुपचुप हुए देवरिया जेल से रिहा

देवरिया (Deoria) से जुड़ी एक अहम घटनाक्रम में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। कुछ समय पहले फिल्मी अंदाज में गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद अब उनकी रिहाई भी बेहद गोपनीय तरीके से हुई। बुधवार शाम देवरिया जेल में उनकी रिहाई का परवाना पहुंचा और देर शाम तक औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें रिहा कर दिया गया। बताया जा रहा है कि यह पूरी प्रक्रिया इतनी शांत तरीके से संपन्न हुई कि स्थानीय स्तर पर भी इसकी तत्काल जानकारी नहीं हो सकी।

गोपनीय तरीके से रिहाई की प्रक्रिया:
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रिहाई आदेश जेल प्रशासन को बुधवार शाम प्राप्त हुआ। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर अमिताभ ठाकुर को मुक्त कर दिया गया। रिहाई के बाद वे अपने परिजनों के साथ चुपचाप देवरिया (Deoria) से रवाना हो गए। उनके अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने बताया कि रिहाई का परवाना शाम को जेल भेजा गया था, हालांकि इसके आगे की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

अमिताभ ठाकुर 10 दिसंबर से देवरिया जेल में निरुद्ध थे। उन्हें एक प्लांट आवंटन से जुड़े मामले में आरोपित किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही यह प्रकरण प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ था।

क्या है पूरा मामला:
अमिताभ ठाकुर पर धोखाधड़ी और दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि वर्ष 1999 में देवरिया (Deoria) में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर देवरिया औद्योगिक आस्थान में एक प्लांट का आवंटन कराया। आवंटन से जुड़े दस्तावेजों में नामों को लेकर विसंगति सामने आई। अभिलेखों में अमिताभ ठाकुर का नाम अजिताभ तथा नूतन ठाकुर का नाम नूतन देवी दर्ज पाया गया।

इस प्रकरण को लेकर सितंबर 2025 में लखनऊ (Lucknow) के तालकटोरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच विशेष जांच दल को सौंपी गई। जांच की प्रक्रिया के दौरान 9 दिसंबर को दिल्ली जाते समय शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया और वे देवरिया जेल में निरुद्ध रहे।

कानूनी प्रक्रिया और आगे की स्थिति:
मामले में दर्ज आरोपों की जांच विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत की गई। गिरफ्तारी और निरुद्धि के बाद अब उनकी रिहाई से प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि रिहाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिवक्ता के अनुसार, आदेश के अनुपालन में रिहाई की गई है।

यह मामला प्रशासनिक पद पर रहते हुए आवंटन प्रक्रिया और दस्तावेजों में दर्ज नामों की विसंगति से जुड़ा है। जांच एजेंसियों द्वारा दर्ज मुकदमे के आधार पर विधिक कार्रवाई की गई थी। रिहाई के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी।

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