Video: अलीगढ़ में वक़्फ़ संपत्तियों को लेकर सौंपा गया ज्ञापन

रिपोर्टर: जेड ए खान

अलीगढ़ (Aligarh) में वक़्फ़ संपत्तियों से जुड़े मामलों में सामने आ रहे भ्रष्टाचार, अवैध कब्ज़ों और गैरकानूनी लेन-देन को लेकर आवाज़ उठाई गई। मुस्लिम धार्मिक विद्वानों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। यह ज्ञापन शाही मुख्य मुफ़्ती उत्तर प्रदेश मौलाना चौधरी इफ़राहीम हुसैन (Maulana Chaudhary Ifrahim Hussain) के नेतृत्व में सौंपा गया, जिसमें वक़्फ़ संपत्तियों के संरक्षण और पारदर्शी प्रबंधन पर जोर दिया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने जताई गंभीर चिंता:
ज्ञापन के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वक़्फ़ संपत्तियों में लंबे समय से अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर अवैध कब्ज़े हैं और कुछ मामलों में गैरकानूनी लेन-देन की शिकायतें मिल रही हैं। इन स्थितियों से वक़्फ़ के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंच रहा है और जरूरतमंद वर्ग को मिलने वाला लाभ प्रभावित हो रहा है।

कानूनी प्रावधानों का दिलाया गया ध्यान:
प्रतिनिधिमंडल ने वक़्फ़ संशोधन क़ानून 2025 और उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि कानून के तहत वक़्फ़ संपत्तियों का सर्वे कराया जाए, उनका डिजिटलीकरण हो और सभी रिकॉर्ड अद्यतन किए जाएं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सके।

अवैध कब्ज़े हटाने की मांग:
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि वक़्फ़ संपत्तियों पर किए गए अवैध कब्ज़ों को चिन्हित कर हटाया जाए। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि अवैध कब्ज़ों के कारण वक़्फ़ की जमीन और भवनों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आय-व्यय में पारदर्शिता पर जोर:
प्रतिनिधिमंडल ने वक़्फ़ संपत्तियों से होने वाली आय और उसके खर्च में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि आय-व्यय का नियमित ऑडिट कराया जाए और इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।

गरीब और जरूरतमंदों का हक़:
मौलाना चौधरी इफ़राहीम हुसैन (Maulana Chaudhary Ifrahim Hussain) ने कहा कि वक़्फ़ संपत्तियां गरीब और जरूरतमंद लोगों का हक़ हैं। इनका सही उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण के कार्यों में होना चाहिए। यदि संपत्तियों का दुरुपयोग होता है तो यह सीधे तौर पर समाज के कमजोर तबके के अधिकारों का हनन है।

प्रशासन से ठोस कदम की अपेक्षा:
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से अपेक्षा जताई कि ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिनिधियों का कहना था कि प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जाने से वक़्फ़ संपत्तियों से जुड़े विवादों में कमी आएगी और भरोसा बहाल होगा।

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