नोएडा (Noida) की दादरी विधानसभा में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने करीब 55 मिनट का संबोधन देकर चुनावी माहौल को गरमाने का प्रयास किया। इस दौरान उनका फोकस महिला, किसान और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने भूमि अधिग्रहण के मामलों में बाजार दर पर मुआवजा देने का वादा कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े किसान वर्ग को साधने की रणनीति अपनाई।
भाईचारा रैली के जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश:
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने इस जनसभा को ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ नाम देकर हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के बीच दूरी कम करने का संदेश देने की कोशिश की। पश्चिमी उत्तर प्रदेश (West UP) में यदि जाट और गुर्जर जैसे प्रभावशाली वोटबैंक में पार्टी सेंध लगाने में सफल होती है, तो 136 सीटों पर चुनावी तस्वीर बदल सकती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद (RLD) ने 43 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी (BJP) को 93 सीटों पर जीत मिली थी। अब सपा इस अंतर को कम करने के लिए सक्रिय नजर आ रही है।
गुर्जर बेल्ट में रैली, कई बिरादरियों की मौजूदगी:
दादरी में आयोजित यह रैली गुर्जर बहुल क्षेत्र में हुई, जहां बड़ी संख्या में जाट और अन्य समुदायों के लोग भी पहुंचे। सपा ने यह संकेत देने की कोशिश की कि वह पश्चिमी यूपी से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कर चुकी है। 2013 के दंगों के बाद यहां हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के बीच दूरी बढ़ गई थी, जिसे पाटने के प्रयास पहले भी किए गए। 2019 में चौधरी अजीत सिंह (Ajit Singh) और 2022 में जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) ने गठबंधन के जरिए इस खाई को कम करने की कोशिश की थी।
मिहिर भोज की प्रतिमा का ऐलान, गुर्जर समाज को साधने का प्रयास:
अखिलेश यादव ने दादरी से घोषणा की कि लखनऊ (Lucknow) के रिवर फ्रंट पर मिहिर भोज (Mihir Bhoj) की प्रतिमा स्थापित कराई जाएगी। मिहिर भोज को गुर्जर समाज अपना नायक मानता है, ऐसे में यह घोषणा सीधे तौर पर इस वर्ग को जोड़ने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है। सपा की गैर-यादव पिछड़ा वर्ग (OBC) नीति में गुर्जर समाज की अहम भूमिका मानी जाती है। इस घोषणा के जरिए पार्टी ने सामाजिक पहचान और सम्मान के मुद्दे को भी उठाया।
विकास मॉडल और एयरपोर्ट पर उठाए सवाल:
अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार के विकास मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और विकास के दावे वास्तविकता से अलग हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ, उनमें कई संचालित नहीं हो रहे हैं। साथ ही गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) के एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने यह भी कहा कि मेट्रो और कनेक्टिविटी का काम सपा सरकार की देन है।
किसानों को साधने की रणनीति पर जोर:
दादरी के मंच से अखिलेश यादव ने पश्चिमी यूपी के लगभग 3 करोड़ किसानों को साधने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है, तो भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों को बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में खेती-किसानी मुख्य आधार है और यहां के चुनावी नतीजों में किसानों की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।
चुनावी रणनीति में बदलाव के संकेत:
इस रैली के जरिए सपा ने साफ संकेत दिया कि वह पश्चिमी यूपी में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के सहारे अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। जाट, गुर्जर और अन्य वर्गों को साथ लाकर पार्टी 2022 के चुनावी परिणामों को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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