उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव, लोकसभा उप चुनाव और विधान परिषद में टिकट को लेकर पार्टी में कहीं न कहीं असंतोष का सामना कर रहे अखिलेश यादव के तमाम समीकरणों के बावजूद गठबंधन में भारी असंतोष के बादल छाने लगे हैं. पहले से बेटे को विधान परिषद का टिकट नहीं देने से नाराज बैठे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर के बाद महान दल के मुखिया केशव देव मौर्य ने गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया है.
ध्यान देने वाली बात है कि सुभासपा के मुखिया ओम प्रकाश राजभर अपने बेटे के लिए विधान परिषद का टिकट चाहते थे, लेकिन सपा प्रमुख ने उनको टिकट नहीं दिया है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीयूष मिश्रा ने ट्वीट कर लिखा- ‘समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @yadavakhilesh जी का आज का फैसला निश्चित ही @SBSP4INDIA के कार्यकर्ताओं को निराश करने वाला है,एक सहयोगी 38 सीट लड़कर 8 सीट जीतते है तो उन्हें राज्यसभा,हमें वहां कोई ऐतराज नहीं, लेकिन हम 16 सीट लड़कर 6 सीट जीतते है तो हमारी उपेक्षा, ऐसा क्यों?’
हालांकि जैसे ही राजनैतिक गलियारों में इस बात की चर्चाएं शुरू हो गईं कि ओम प्रकाश राजभर बीजेपी में जाने का मन बना रहे हैं इसी बीच पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीयूष मिश्रा ने दूसरा ट्विट कर ये साफ कर दिया कि पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ के साथ है और रहेगी.
इधर राज्यसभा में अखिलेश यादव अपनी पार्टी से सिर्फ एक जावेद अली खान को ही भेज पाए हैं. अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव के नाम की चर्चा अंतिम समय तक होती रही, जबकि बाद में आरएलडी अध्यक्ष जयंत चौधरी ने नामांकन कर दिया. इस बात को लेकर जहां चर्चा रही कि आरएलडी से नामांकन कर जयंत चौधरी ने सपा को मिलने वाली एक सीट पर राज्यसभा जाने में सफलता हासिल की तो वहीं अखिलेश को रणनीतिक रूप से इसमें अपने गठबंधन के साथी को साथ रखने के लिए समझौता करना पड़ा.
इधर निर्दलीय कपिल सिब्बल को भी समर्थन सपा ने दिया. नाराज आजम खान को देखते हुए कपिल सिब्बल को साथ देने का फैसला भी अहम है, क्योंकि कपिल सिब्बल ने आजम की जमानत में अहम भूमिका निभाई थी. नतीजा ये कि सपा के खाते की तीन सीटों में से एक पर आरएलडी और एक पर निर्दलीय राज्यसभा पहुंचे जबकि सपा की अब सिर्फ एक सीट रह गयी. लोकसभा उपचुनाव के लिए आजगढ़ सीट से अखिलेश यादव ने पहले पहले सुशील आनंद का नाम फाइनल किया था पर ऐन वक्त पर धर्मेंद्र यादव ने नामांकन किया.