हैदराबाद: देश में डिवीजन नहीं विजन की राजनीति होनी चाहिए: अखिलेश यादव

रिपोर्टर: अनुज कुमार

हैदराबाद। विजन इंडिया एआई समिट (Vision India AI Summit) के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी डेवलपमेंट और प्रोग्रेसिव पॉलिटिक्स की दिशा में काम करना चाहती है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है और इस तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। किसी के साथ जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ऐसा स्वरूप विकसित होना चाहिए, जिससे भेदभाव समाप्त हो सके और समान अवसर सुनिश्चित हों।

तकनीकी बदलाव और समानता की जरूरत:
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल विकास नहीं, बल्कि सामाजिक समानता भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल इस तरह होना चाहिए, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को भी उसका पूरा लाभ मिले। उनका कहना था कि यदि तकनीक का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो यह समाज में व्याप्त असमानताओं को कम करने का सशक्त माध्यम बन सकती है।

साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम पर चिंता:
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में बढ़ते साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज साइबर धोखाधड़ी के मामलों में प्रदेश नंबर वन बन चुका है। ऑनलाइन स्कैम लगातार बढ़ रहे हैं और राजनीतिक प्लेटफार्म से एआई तथा डीप फेक वीडियो का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति लोकतंत्र और आम लोगों की सुरक्षा के लिए चुनौती बनती जा रही है।

निगरानी और गोपनीयता से जुड़ी आशंकाएं:
उन्होंने एक्सप्रेस-वे से जुड़ी एक खबर का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबी दूरी की कैमरा रेंज के कारण वाहनों के अंदर तक की वीडियो रिकॉर्ड की जा रही है। यहां तक कि सुबह खेत की ओर जा रहे लोगों की गतिविधियों के वीडियो भी बनाए गए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं गोपनीयता के अधिकार पर सवाल खड़े करती हैं। एआई जहां ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुविधा देता है, वहीं इसके दुरुपयोग की आशंका भी बनी रहती है, इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है।

एआई समिट में सार्थक चर्चा:
अखिलेश यादव ने कहा कि एआई समिट में कई महत्वपूर्ण और सकारात्मक चर्चाएं हुईं। उन्होंने बताया कि यदि भविष्य में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बेहतर और जिम्मेदार उपयोग कर आम लोगों को लाभ पहुंचाने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सोच के अनुसार, जिससे सबकी भलाई हो वही सच्चा एआई है।

शहरी व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर सुझाव:
समिट के दौरान शहरों के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, ट्रैफिक सिस्टम को बेहतर बनाने, बिजली व्यवस्था सुधारने, जल प्रबंधन और एयर क्वालिटी को बेहतर करने को लेकर कई सुझाव सामने आए। इसके साथ ही पुलिसिंग में एआई के प्रयोग को लेकर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने कहा कि इन विषयों पर विशेषज्ञों से संवाद किया गया और सभी प्रतिनिधियों के सुझावों के लिए आभार व्यक्त किया गया।

कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में एआई की भूमिका:
उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एआई का उपयोग बेहद प्रभावी हो सकता है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और किसानों के नुकसान को रोकने में भी एआई सहायक साबित हो सकता है। उनका कहना था कि एआई आने वाले समय में लगभग हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है और इसके सकारात्मक उपयोग की दिशा तय करना आवश्यक है।

एसआईआर और मतदान से जुड़ा आरोप:
अखिलेश यादव ने एसआईआर को लेकर कहा कि चुनाव आयोग (Election Commission) का काम मतदाता बनवाना है, न कि किसी का वोट काटना। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के बहाने सरकार एनआरसी की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। उनका दावा था कि उत्तर प्रदेश में करोड़ों लोगों के वोट काटे जा रहे हैं और जिस ऐप से मैपिंग हो रही है, उसमें आने वाले डेटा में काफी अंतर है। उन्होंने यह भी कहा कि मैपिंग में इस्तेमाल हो रहा ऐप उसी कंपनी का है, जिसने पहले भाजपा को इलेक्टोरल बॉन्ड दिया था।

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