आगरा में हत्या के एक मामले की जांच के दौरान पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि 35 साल के एक युवक को पूछताछ के नाम पर पुलिस ने हिरासत में लेकर लगातार दो दिनों तक थर्ड डिग्री दी। युवक का कहना है कि उस पर हत्या कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा था और इसी दौरान मारपीट इतनी बेरहमी से की गई कि उसके दोनों पैर टूट गए। हालत बिगड़ने पर उसे किरावली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
हत्या के मामले में उठाया गया युवक:
बताया गया कि युवक को आगरा (Agra) में दर्ज एक हत्या के मामले में पूछताछ के लिए पुलिस ने हिरासत में लिया था। परिजनों का कहना है कि युवक को पूछताछ के बहाने थाने बुलाया गया, लेकिन वहां उससे सामान्य पूछताछ की जगह शारीरिक यातनाएं दी गईं। युवक का आरोप है कि उससे लगातार हत्या स्वीकार करने को कहा जा रहा था और इनकार करने पर मारपीट की जाती रही।
दो दिन तक लगातार टॉर्चर का आरोप:
युवक ने बताया कि पुलिस ने उसे दो दिनों तक लगातार प्रताड़ित किया। इस दौरान लात-घूंसे और डंडों से पीटा गया। युवक का कहना है कि मारपीट के चलते उसके पैरों में असहनीय दर्द होने लगा, लेकिन पुलिस ने इलाज की कोई व्यवस्था नहीं की। जब दर्द और चोटें बढ़ती चली गईं और वह बेहोश हो गया, तब जाकर पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाया।
पैर टूटने का दावा, हालत हुई गंभीर:
पीड़ित युवक का आरोप है कि पुलिस की मारपीट से उसके दोनों पैर टूट गए। शरीर पर कई जगह चोटों के निशान भी बताए जा रहे हैं। युवक का कहना है कि जब वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गया और उसकी हालत बिगड़ गई, तब पुलिसकर्मियों को डर हुआ और उसे इलाज के लिए ले जाया गया।
बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती:
युवक के अनुसार, मारपीट के बाद वह पूरी तरह बेहोश हो गया था। इसके बाद पुलिसकर्मी उसे किरावली के एक अस्पताल (Kirawali Hospital) में भर्ती कराने ले गए। अस्पताल में होश आने पर उसे पता चला कि उसके पैरों में गंभीर चोटें हैं और चलना मुश्किल हो गया है।
कबूलनामे के लिए दबाव बनाने का आरोप:
पीड़ित का कहना है कि पूछताछ के दौरान उस पर लगातार हत्या कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा था। उसने बताया कि जब उसने खुद को निर्दोष बताया और आरोप स्वीकार करने से इनकार किया, तो मारपीट और बढ़ा दी गई। उसका दावा है कि यह सब उसे मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ने के लिए किया गया।
परिजनों ने उठाए सवाल:
युवक के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि युवक दोषी भी होता, तो कानून के दायरे में रहकर पूछताछ की जानी चाहिए थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने कानून की सीमाओं को लांघते हुए थर्ड डिग्री का सहारा लिया, जिससे युवक की जान तक खतरे में पड़ गई।
जांच प्रक्रिया पर खड़े हुए सवाल:
इस पूरे मामले ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और हिरासत में पूछताछ के तरीकों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आरोप है कि पूछताछ के दौरान कानूनन तय मानकों का पालन नहीं किया गया। युवक के शरीर पर आई चोटों ने पुलिस की भूमिका को संदेह के घेरे में ला दिया है।
न्याय की मांग और आगे की उम्मीद:
पीड़ित युवक और उसके परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं आम लोगों का कानून और व्यवस्था से भरोसा कमजोर करती हैं।
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