जनता से दूर नहीं, बन गये जन जन के आस – अफजाल ने कहा ऐसे होता है विकास

190 करोड़ से 250 किलोमीटर की 36 सड़कों से गाजीपुर में असली विकास का दावा करने वाले सांसद अफजाल अंसारी पुरे 5 साल चर्चाओं में बने रहे. जब जब वो विकास की एक नयी लकीर खींचते तब तब चर्चाएं उनके मुकदमों की होती. 2019 में मोदी लहर में बम्पर मतों से चुनाव जितने वाले अफजाल अंसारी का ये पांच साल कुछ यूँ गुजरा कि जैसे मानों एक कदम कोर्ट में है तो दूसरा कदम किसी गाँव में, जहाँ वो किसी सड़क का उद्घाटन कर रहे हैं. खबर आती कि वो किसी सड़क का उद्घाटन कर रहे हैं तभी दूसरी खबर आती की वो जिला न्यायलय पहुंचे हैं. जब इतने से 70 साल के अफजाल अंसारी की उर्जा कम नहीं हुई तो तीसरी खबर आई की वो जेल में हैं. गाँव से शहर को जोड़ते जोड़ते अफजाल अंसारी का बतौर सांसद जनता से नाता टूट गया. यानि स्थानीय अदालत द्वारा सजा का एलान किया गया और उनकी संसद सदस्यता रद्द हो गयी. उस बिच अफजाल अंसारी का एक बयान मीडिया में गूंज रहा था कि जीत सत्य की होगी. हुआ भी वैसा ही मामला हाई कोर्ट और फिर हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, सजा पर रोक लगी और संसद सदस्यता भी बहाल हो गयी. सवाल तो विचारधाराओं की खाई का था. सवाल तो विकास से विकास की लडाई का था.

गाजीपुर में हुआ सड़कों का विस्तार
अब गाँव गाँव में विकास की रफ़्तार
अब शहर जाकर कर सकेंगें रोजगार
साफ़ नियत और सोच ईमानदार
190 करोड़ का तोहफ़ा शानदार
कई बार हुए राजनीति के शिकार
जब हो रहा था बुल्डोज़र का वार
तब दे दिया 250 किलोमीटर सड़कों का उपहार

गाजीपुर में गाँव गाँव के अंतिम व्यक्ति की एक ही मांग थी कि हम गाँव से शहर की तरफ कैसे बढें? जिला मुख्यालय तक हमारा सफ़र कैसे आसान बने. कैसे गाँव में रोजगार बढे? कैसे गाँव के लोग रोजगार की और बढ़ें? गाँव की कनेक्टिविटी यदि शहरों से आसान हो जाए तो गाँव में सुख सुविधाओं का विस्तार हो जाता है. छोटे से लेकर बड़े सामान तक शहरों से गाँव में आता है. चाहे वो गाँव के बाज़ारों को गुलजार करने की बात हो, चाहे उच्च शिक्षा या रोजगार के लिए मुख्यालय तक अपने आवागमन की बात हो, उसके लिए जरुरत होती है अच्छे सड़कों की. सड़कें गाँव से मुख्यालय की दुरी तो कम करती हैं , साथ ही लोगों के आम जीवन को आसान बनाती हैं. समय की बचत के साथ रोजगार और शिक्षा का भी विस्तार होता है. 2017 से पहले खबरें आती थी कि अखिलेश यादव पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बना रहे हैं, खबरें आती थी गाजीपुर में अस्पताल का विस्तार हो रहा है, मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हो रहा. लेकिन सवाल था कि गाँव से शहर का सफ़र किया कैसे जाये. गाँव से शहर आते आते ही आधा दिन गुजर जाता है. अफजाल अंसारी का कहना है कि ये जनता का असली दर्द था जिसका प्राथमिकता पर समाधान करना मेरा कर्त्तव्य था. सांसद निधि से गाँव की कई समस्याओं का समाधान तो किया ही गया अब जरुरत थी कि गाँव को अच्छी सड़कें देने की. केंद्र सरकार के पक्षपात की वजह से ये बड़ी चुनौती थी, लेकिन एक पुरानी योजना थी जिसका नाम है प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, जिसमे एक सांसद को अधिकार होता है गाँव की सड़क बनाने का. अफजाल अंसारी ने इस योजना को धरातल पर लाने के लिए पूरा जोर लगा दिया. कई मीटिंग हुई, कई व्यवधान हुए लेकिन अंतत: 190 करोड़ के बजट का इंतज़ाम हुआ और 36 सडकें बनाने में कामयाबी मिली. जिसकी लम्बाई करीब 250 किमी की है.

हुआ गाँव गाँव का असली विकास

अफजाल अंसारी का कहना है कि उनके खिलाफ खूब झूठा प्रचार किया जा रहा है कि “मैं 5 साल नज़र नहीं आया, इन 5 सालों में मुझे तोड़ने का खूब प्रयास हुआ तब भी मैं जनता के बिच पहुँचता रहा और उनकी समस्याओं का समाधान करता रहा. जब विरोधियों को बर्दास्त नहीं हुआ तो मेरे खिलाफ साजिश रची गयी, अपने ताकत का इस्तेमाल किया गया. मुझसे पहले जो सांसद थे उनके पास सत्ता भी थी और ताकत भी लेकिन गाँव को शहर से जोड़ नहीं पाए, काम वही हुआ जिसमे अपनों की जेब गरम की जा सके. आज गाँव गाँव की ये सड़कें मेरा जनता की प्रति प्यार का जीता जागता उदाहरण है. मेरा प्रण है कि मुझे अमीर को और अमीर नहीं बनाना है, मुझे तो हर गरीब को उस का हक़ दिलवाना है.”

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading