शस्त्र लाइसेंस मामले में सांसद अफजाल अंसारी पर मुकदमा, रिकॉर्ड गायब मिलने का आरोप; सांसद ने कहा- यह पूरी तरह मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण साजिश

लखनऊ/गाजीपुर। समाजवादी पार्टी (सपा) के गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्तार अंसारी गिरोह (आईएस-191) से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच के दौरान पुलिस ने सांसद के शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावलियां और शस्त्र खरीद-बिक्री से संबंधित अभिलेख जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के अभिलेखागार से गायब मिलने का दावा करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, इस पूरे मामले पर सांसद अफजाल अंसारी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक और प्रशासनिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई बताया है।

पुलिस जांच में क्या सामने आया

पुलिस के अनुसार, मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच के दौरान सांसद अफजाल अंसारी के लाइसेंस से संबंधित मूल पत्रावली और शस्त्र खरीद-बिक्री के अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले। जांच एजेंसियों का कहना है कि संबंधित लाइसेंस पर खरीदी गई राइफल की वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

इसी आधार पर कोतवाली पुलिस ने सांसद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में तत्कालीन असलहा लिपिक प्रथम अशफाक अहमद और द्वितीय गोरीशंकर राम को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि दोनों का निधन हो चुका है। पुलिस के अनुसार अशफाक अहमद वर्ष 1983 से 1985 तथा गोरीशंकर राम वर्ष 1988 से 1990 तक कलेक्ट्रेट के असलहा पट्टल पर तैनात रहे थे और इसी अवधि में रिकॉर्ड में गड़बड़ी होने का आरोप है।

51 लाइसेंस और 145 हथियारों की जांच

डीआईजी वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण के निर्देशन में चल रही जांच के तहत पुलिस टीमों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा दिल्ली, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश तक जाकर शस्त्र लाइसेंसों और हथियारों का सत्यापन किया है।

पुलिस के मुताबिक अब तक गिरोह से जुड़े 51 शस्त्र लाइसेंसों और 145 हथियारों का सत्यापन किया जा चुका है। जांच के दौरान कई लाइसेंसों की मूल पत्रावलियां और खरीद-बिक्री से जुड़े अभिलेख नहीं मिले, जबकि कुछ हथियारों की वर्तमान स्थिति का भी पता नहीं चल सका।

तीन लाइसेंस और रिकॉर्ड गायब होने का दावा

पुलिस का कहना है कि अफजाल अंसारी के लाइसेंस संख्या 1188-पी-2 से संबंधित मूल पत्रावली और खरीद-बिक्री के अभिलेख कथित रूप से तत्कालीन शस्त्र लिपिकों की मिलीभगत से गायब कराए गए। इसी लाइसेंस पर खरीदी गई राइफल की वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

गाजीपुर से दिल्ली, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश तक फैली जांच

पुलिस जांच में दावा किया गया है कि मुख्तार अंसारी के प्रभाव के दौरान शस्त्र लाइसेंस जारी कराने और हथियारों की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। जांच एजेंसियों के अनुसार इसका नेटवर्क गाजीपुर से लेकर दिल्ली, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश तक फैला हुआ था।

जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कागजों में कई हथियार असलहा दुकानदारों को बेचे हुए दर्शाए गए, जबकि वास्तविकता में वे संबंधित लोगों के पास ही रखे गए। इस मामले की जांच दो एसएसपी, तीन सीओ और पुलिस की कई टीमों ने की है। पुलिस का कहना है कि कई ऐसे हथियार भी मिले जिनका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

पुलिस के अनुसार अफजाल अंसारी को तीन शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए थे और इन लाइसेंसों पर कई बार हथियारों की खरीद-बिक्री हुई। पुलिस का यह भी कहना है कि सांसद को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

पुलिस अधीक्षक का दावा

पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा के अनुसार जानबूझकर शस्त्रों को रिकॉर्ड से गायब कर गिरोह में उनका उपयोग किया गया तथा कागजों में उन्हें बेचा हुआ दिखाया गया। पुलिस का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में सांसद और तत्कालीन लिपिकों की मिलीभगत से कागजी हेराफेरी की गई। फिलहाल पुलिस टीम हथियारों का सत्यापन और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

इस मामले में आईपीसी की धारा 409, 120-बी तथा आर्म्स एक्ट की धारा 21/25 और 30 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत विभिन्न अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है।




सांसद अफजाल अंसारी का पक्ष

हमने सांसद अफजाल अंसारी से उनका पक्ष जाना उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके शस्त्र लाइसेंस संख्या 1188-पी-2 और उससे जुड़े रिकॉर्ड को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह मनगढ़ंत, झूठी और दुर्भावनापूर्ण साजिश का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि यह लाइसेंस वर्ष 1983 का है और इसी लाइसेंस पर उन्होंने 1990 में अंतिम बार राइफल खरीदी थी। उनके अनुसार वह राइफल आज भी पूरी तरह वैध है। उन्होंने बताया कि इस लाइसेंस का हर तीन वर्ष में नियमानुसार नवीनीकरण कराया जाता रहा है और इसकी मौजूदा वैधता 31 दिसंबर 2026 तक है। उनका कहना है कि लाइसेंस से जुड़े सभी रिकॉर्ड कंप्यूटर में उपलब्ध हैं और खरीद का मूल कैश मेमो भी सुरक्षित है।

अफजाल अंसारी ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह गलत है कि मूल पत्रावली या खरीद-बिक्री के अभिलेख तत्कालीन लिपिकों की मिलीभगत से गायब कराए गए। उनके मुताबिक यह प्रशासन के कुछ अधिकारियों की हठधर्मिता और अधिकारों के दुरुपयोग का परिणाम है।

सजा, सदस्यता और शस्त्र जमा कराने का घटनाक्रम

सांसद ने बताया कि 29 अप्रैल 2023 को उन्हें एक मामले में चार वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 3 मई 2023 को जिला प्रशासन ने उनका शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर शस्त्र जमा करा लिया था।

उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी। उनके अनुसार 14 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने उनका अयोग्यता (डिस्क्वालिफिकेशन) आदेश समाप्त करते हुए संसद सदस्यता बहाल कर दी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर उन्होंने कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए अपना लाइसेंस और शस्त्र वापस लेने के लिए जिलाधिकारी के समक्ष आवेदन किया।

राज्य सरकार के रुख पर उठाए सवाल

अफजाल अंसारी ने कहा कि जब उन्होंने लाइसेंस और शस्त्र वापस लेने के लिए आवेदन किया तो राज्य सरकार ने अदालत में अपना जवाब दाखिल किया। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ बताए जा रहे 12 मामलों में से 11 मामले वर्षों पहले समाप्त हो चुके हैं और केवल एक मामला लंबित है, जिसमें भी कानूनी प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों की मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी है या जिन मामलों का निस्तारण बहुत पहले हो चुका है, उन्हीं पुराने मामलों और दस्तावेजों के आधार पर उनके खिलाफ नए मुकदमे और फाइलें तैयार की जा रही हैं।

न्यायपालिका पर भरोसा जताया

अफजाल अंसारी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उनका कहना है कि जब पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिल चुकी है और उनकी सदस्यता बहाल हुई है, तो इस मामले में भी उन्हें न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि देश की न्यायपालिका का उद्देश्य हर व्यक्ति को निष्पक्ष न्याय दिलाना है और उन्हें विश्वास है कि अंततः सत्य की जीत होगी।

> नोट: उपरोक्त भाग सांसद अफजाल अंसारी के बयान का सरल भाषा में तैयार किया गया सार है। यह उनके सार्वजनिक पक्ष का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण है। मामले की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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