दो हज़ार शिक्षकों पर चला प्रशासन का हंटर…

रिपोर्ट: हसीन अंसारी

ग़ाज़ीपुर। गरीबी एक ऐसा अभिशाप है जिस का शोषण कभी बंद नहीं होता। एक मां बाप अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल इसलिए भेजना चाहता है क्योंकि उसके बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिल सके। लेकिन वहां पर भी उस गरीब मां-बाप का दोहन हो जाता है। जो टिक गया उसने तो पढ़ा लिया लेकिन जो बेबस हो गया, वह अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाता है। सरकारी स्कूल में पढ़ाई की व्यवस्था की पोल जनता ही खोल देती है। अगर सरकारी स्कूल की व्यवस्थाएं ठीक होती तो गरीब मां-बाप अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजने के लिए संघर्ष ना करते। अभी बात यहीं खत्म नहीं होती अब तो सरकारी विद्यालयों की लापरवाही इस कदर है कि सरकार जो राहत गरीब मां-बाप को देती है उसको भी वह राहत नहीं मिल रही है और यह खुद बेसिक शिक्षा अधिकारी ने साबित कर दिया।

हमारे संवादाता हसीन अंसारी ने बताया कि गाजीपुर जनपद में बच्चों के आधार कार्ड के सत्यापन में लापरवाही पर शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की गई है।बीएसए ने जिले के 320 परिषदीय विद्यालयों के 2 हजार शिक्षकों के वेतन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है।

मामला बच्चों के आधार कार्ड के सत्यापन में लापरवाही से जुड़ा हुआ है।बताया जा रहा है कि परिषदीय स्कूलों के 20 हजार बच्चों के आधार कार्ड का अभी तक सत्यापन नही हो पाया है। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभाकों के खाते में विभिन्न योजनाओं का पैसा डीबीटी के माध्यम से भेजा जाता है। डीबीटी के लिए आधार कार्ड का सत्यापन जरूरी है। ऐसे में बच्चों को योजनाओं का लाभ नही मिल पा रहा है।

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