मानवता, इस शब्द का प्रयोग आमतौर पर सभी करते हैं लेकिन कब किसकी कहाँ मानवता मर जाए ये कहा नहीं जा सकता। इस शब्द का इस्तेमाल अस्पतालों की चर्चाओं में खूब होता है लेकिन क्या इस्तेमाल करने वाले अन्य जगहों पर अपनी मानवता का परिचय देते हैं, खैर कुछ लोगों के अन्दर मानवता तो अवधा पाते ही मर जाता और मर जाती है देश और समाज के पार्टी अपनी वफादारी।
उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर में हाईवे व फोरलेन पर कहीं न कहीं दुर्घटनाएं होती है, जिसमें लोग घायल होते हैं। कई बार तो लोगों की जान चली जाती है। दुर्घटना के बाद घायलों को स्थानीय पीएचसी सीएचसी पर ले जाने के बाद वहां से रेफर होने पर राजकीय मेडिकल कालेज के अस्पताल ले आया जाता है। यहां से घायल को वाराणसी ट्रामा सेंटर रेफर का पर्चा थमा दिया जाता है। 80 किमी ले जाने के दौरान मरीज की जान का खतरा बना रहता है। उस पर निजी एम्बुलेंस का खेल, दवाओं का खेल और निजी अस्पतालों के दलालों का खेल। ये सब किससे छिपा है? सवाल तो ये हैं अगर सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज और ट्रामा सेंटर की व्यवस्था जब दी गयी है तो उसका इस्तेमाल इलाज में क्यों नहीं होता? गाजीपुर के ट्रामा सेण्टर का भी यही हाल था, इसे तो दवाई का गोदाम बना दिया गया, एक तो ये मेडिकल कॉलेज और ट्रामा सेण्टर, राजनीति की रणनीति वाले मिश्रण से तैयार हुआ है उसपर से यहाँ के सीएमओ साहब की निति भी खूब है। अरे भैया ट्रामा सेंटर को दवाई का गोदाम कौन बनता है? अब जरा सोचिये जब से ट्रामा सेण्टर बना है और इसका उपयोग ना होंने की वजह से अगर कोई मौत हुई है तो उसका जिम्मेदार कौन है?
खैर इसी सामाजिक व्यवस्था में कुछ देश और समाज के वफादार भी हैं और मानवता का सही उदहारण भी पेश कर रहे हैं, गाजीपुर ट्रामा सेण्टर के इस हाल को लेकर छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष और समाजसेवी दीपक उपाध्याय और उनके सहयोगियों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, गाजीपुर के जिलाधिकारी की भी तारीफ करनी होगी उन्होंने भी इस मुद्दे से सम्बंधित प्रमुख सचिव और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को संबोधित पत्र को आगे बढ़ाया होगा, जिसका नतीजा ये हुआ कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने इसका संज्ञान लिया, उन्होंने इसे चालू करने के निर्देश सीएमओ डा. सुनील पांडेय को दिया।
वर्षों से दवा का गोदाम बने ट्रामा सेंटर को अब खाली करा दिया गया है। मार्च माह में इसे चालू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। ट्रामा सेंटर की रंगाई पोताई शुरू हो गई है। इसके चालू होने से सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को काफी लाभ मिलेगा। हालांकि अभी एक्सरे सहित अन्य मशीनें मंगाने की शासन स्तर से प्रयास शुरू है। मशीनें उपलब्ध होने के बाद यह चालू हो जाएगा।
ट्रामा सेंटर में रखी दवाएं हटवा दी गई है। इसे जल्द ही चालू करा दिया जाएगा। इसके लिए डाक्टर, स्टाफ की तैनाती के साथ ही शासन से जरूरी सामान की मांग की गई है। उम्मीद है कि अगले महीने तक ट्रामा सेंटर में मरीजों का उपचार शुरू हो जाएगा। – डा. सुनील पांडेय, सीएमओ।
जिला चिकित्सालय में ट्रामा सेंटर का निर्माण कराया गया था, ताकि दुर्घटना होने पर मरीजों को यहां से वाराणसी के बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर न ले जाना पड़े। वर्ष 2021 तक यह ट्रामा सेंटर बनकर तैयार हुआ था, लेकिन डाक्टर-स्टाफ की तैनाती नहीं हुई। शासन से ट्रामा सेंटर के लिए जरूरी संसाधन भी नहीं भेजा गया जिससे यह चालू हो सके। लिहाजा यह ट्रामा सेंटर दवा का गोदाम बना रहा। ट्रामा सेंटर चालू न होने से दुर्घटना में गंभीर घायल मरीजों को वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। कई बार तो बीच रास्ते में ही मरीज की जान चली जाती है।
“यह गाजीपुर के लोगों के लिए एक बड़ी जीत है। हम पिछले कई वर्षों से ट्रॉमा सेंटर को चालू करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। हम उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव के आभारी हैं जिन्होंने हमारी बात सुनी और त्वरित कार्रवाई की।” :- दीपक उपाध्याय, छात्र नेता व समाजसेवी