ग़ाज़ीपुर महिला अस्पताल में शर्मसार होती मानवता। आंदोलन की चेतावनी

 

अभिनेन्द्र की कलम से ……………….

अस्पताल हो वो भी सरकारी तो उसका आलग ही आनंद है, ये किसी पर्यटन स्थल से कम तो नहीं है, क्योंकि यहाँ की व्यवस्थाओं के सब मारे हैं, आवाज़ जबान से किसी की बहार नहीं आती, यहाँ पर आपको हैवानियत के दर्शन के साथ शिशु के जन्म से पहले वाली वो असीम पीड़ा का दृश्य देखने को मिलेगा, जिसके बारे में सोचकर आपकी रूह न काँप जाये, खैर इसका सुख तो केवल मरीज और उसके परिजन के नसीब में ही है. आप तो दर्शक हैं, जैसा हमेशा करते हैं वैसे ही करते रहिये, वैसे कहते हैं इस पर्यटन स्थल पर ब्लैक मेलिंग, दुर्व्यवहार और दलाली के खुबसूरत नजारों को देखने का भी सौभाग्य प्राप्त होता है.

शौचालय से बहते हुए पेशाब में लिपटा हुआ फर्श, धुल से भरे टाइल्स वाले फर्श पर लेते हुए वो मासूम बच्चे, फटे हुए पेट पर टांका लगवाकर,लंगड़ाते हुए शौचालय के लिए 50 मीटर का सफ़र तय करने वाली माँ, मुफ्त सरकारी दवाइयों के खोखले वादों से धोखा खा कर दलालों से बिकता हुआ नव नवेला बाप, तड़पती गर्भवती के सामने खड़े होकर पैसे के लिए तांडव करती वो सिस्टर, आपके रोम रोम में आक्रोश की आग भर देगी, लेकिन यह तय है कि बाहर निकलते ही डर रूपी पानी से ये आग ठंडा हो जायेगा.

ये गाजीपुर का सरकारी महिला अस्पताल है, जहाँ हर पल टहलता बेताल है ……….. ये अस्पताल है  

 

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