उत्तर प्रदेश में मिली सबसे बड़ी सजा। एंटी माफिया मुहिम में केवल जनपद गाजीपुर के भुज खलीफा वाले बाबा को ही नहीं पूरे के पूरे क्षेत्र को ही सजा दे दी गई। उत्तर प्रदेश के इतिहास का यह सबसे बड़ा प्रशासनिक कार्य है जिसमें केवल बिल्डिंग नहीं गिराई गई। बल्कि तरह-तरह की बीमारियों को पैदा करने का इंतजाम किया गया और ये कृत महिलाएं और मासूम बच्चों सहित तमाम लोगों को मौत के मुंह में धकेलने की एक शातिर योजना मालूम पड़ता है। इतिहास की एक ऐसी सजा जिसमें केवल एक व्यक्ति नहीं हजारों की जनसंख्या से भरे हुए एक क्षेत्र को नर्क बना दिया गया।
ऐसा लगता है कि इस योजना की शुरुआत एक प्लानिंग के जरिए की गई है। सबसे पहले पूरे क्षेत्र को घेरते हुए एक ऊंची सड़क बनाई गई, लेकिन नाला कहीं नहीं बनाया गया। उसके बाद प्रशासनिक कार्यवाई के अंतर्गत एक 6 मंजिला इमारत को भी सड़क पर गिरा दिया गया। पूरे क्षेत्र के अंदर नालियों का पूर्ण निर्माण नहीं हुआ और ना ही सड़कों को ठीक किया गया।
अब नतीजा सुनिए! नाली बंद, पानी भरा, सड़क डूबा, घर डूबा और डूब गया विकास। फैलती बीमारियां, घायल होते बच्चे बूढ़े, हो गया मानवता का सर्वनाश।
अब इनके अपराध को भी समझिए। इस क्षेत्र को जनपद गाजीपुर का रौजा क्षेत्र कहते हैं। यहां चंदन नगर, आवास विकास, काली नगर जैसी रिहायशी कालोनियां है। यहां के ज्यादातर लोग मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और नौकरी व व्यवसाय से संबंधित है। परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इनका अपराध सरकार को टैक्स भरना है। इनका अपराध स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भरोसा करना है। इनका अपराध शांति प्रिय माहौल को बनाए रखना है। इनका अपराध ये है कि ये पढ़े लिखे लोग हैं, ये कानून का पालन करते हैं, ये बार बार सरकार को पत्र लिख कर अपनी समस्या बताते हैं, आंदोलन नही करते, धरना नही करते। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि अब ये धरना करने पर मजबूर हो जाएं।
अब जरा वो जनप्रतिनिधि भी ध्यान दें कि किस मुंह से आओगे वोट मांगने। क्या ऐसी व्यवस्था देख कर आपको शर्म नहीं आती? क्या मानवता आपके हृदय से मर गई है?
खैर हां क्षेत्र के रहने वाले वासी भी जिम्मेदार हैं और कुछ लोगो को कहना है कि इनको सही सजा मिली है क्योंकि इतनी सारी परेशानियां झेलने के बाद भी वह दिन आएगा जब यह फिर से बर्बाद करने वालों का झंडा उठाकर चल पड़ेंगे। जाति के नाम पर धर्म के नाम पर बट जाएंगे। झेलो खूब झेलो। जय हिंद। धन्यवाद

