कोरोना का हाहाकार और जब तड़पती रही मासूम

गाज़ीपुर। कोरोना संक्रमण से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है तो इस कड़ी में उत्तर प्रदेश का जनपद गाजीपुर भी अछूता नहीं है। लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। ऑक्सीजन की कमी से कई मौतें हो रही हैं। रोज सैकड़ों की संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज पाए जा रहे हैं। एक समय था कि गाजीपुर में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या दहाई के आंकड़े में सिमटी हुई थी लेकिन अब गाजीपुर में कोरोना के मरीजों की संख्या हजार के आंकड़े में पहुंच गई है।

गाजीपुर के सदर अस्पताल में कोरोना टेस्टिंग के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो रही है। यह एक ऐसी बीमारी है कि यदि किसी के बेटे को हो जाए, किसी के पति को हो जाए, किसी के भाई को हो जाए तो वह उससे दूर हो जाता है, उसके समीप नहीं जाता।
अखबारों में कई खबरें प्रकाशित हुई कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित होने के बाद अकेलापन महसूस करने पर कईयों ने तो आत्महत्या भी कर ली।

जब जनपद के सभी अस्पतालों में कोरोना की हाहाकार मचा हुआ है तो उसी बीच इन सब चीजों को अनदेखा कर अपनी जान की परवाह किए बगैर एक व्यक्ति एक 4 साल की मासूम की मदद करने पहुंच जाता है। 4 साल की मासूम खून की कमी से तड़प रही थी। उस मासूम की मां की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे। कोरोना संक्रमण की वजह से पूरा अस्पताल अस्त व्यस्त था। ना कोई खून देने वाला था ना कोई मदद करने वाला। जब इस चीज की जानकारी उस व्यक्ति को हुई तो वह अचानक गाज़ीपुर के सदर अस्पताल पहुंचा और डॉक्टर से कहा मैं इस बच्ची को खून देना चाहता हूं।

उस व्यक्ति का नाम था अतीक अहमद राईनी। डॉक्टर ने कहा आपका तो रोजा है तो आप खून कैसे देंगे? अतीक ने कहा मैं इसके लिए रोजा तोड़ दूंगा लेकिन उस बच्ची की जान बचनी चाहिए। अतीक अहमद ने रोजा तोड़कर उस बच्ची को खून दिया। फिलहाल वह बच्ची खतरे से बाहर है।

एक तरफ करोना संकटकाल, दूसरी तरफ राजनीति के ज़हर में बना हुआ है हिंदू मुस्लिम का माहौल। इन सब के बीच अतीक अहमद ने 4 वर्ष की मासूम लाडो गुप्ता को खून देकर उसका जीवन बचा लिया।

इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम रोल निभाया शिवांश त्रिपाठी ने। शिवांश ने ही सोशल मीडिया के माध्यम से खून की अपील की और अतीक राईनी ने संपर्क कर खून दिया। इस पूरे कार्य में रजनीश मिश्रा, शेर अली राईनी और अभिषेक यादव की अहम भूमिका रही।

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