विश्वजीत मिश्रा/अभिनेंद्र की कलम से…
वाराणसी । बढ़ते कोरोना संक्रमण के साथ ही अस्पतालों की बदइंतेजामी भी एक बार फिर दिखने लगी है। ताज़ा मामला बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल से जुड़ा है जहाँ विश्वविद्यालय के एक सीनियर रिसर्च फेलो अभय जायसवाल के कोविड पॉजिटिव होने के बाद जब उन्हें वेंटिलेटर की आवश्यक्ता हुई तो अस्पताल की ओर से उन्हें वह मुहैया नहीं कराया गया, जिसके कारण उनकी मौत हो गयी। वहीं दूसरी तरफ लोगो को रोटी देने वाला,यानी आल इंडियन रोटी बैंक के संस्थापक किशोरकांत तिवारी का निधन भी कोरोना संक्रमण की वजह से हो गया।
वीडियो यहां देखें:
रिसर्च फेलो अभय के दोस्तों और परिवारजनों का तो आरोप है कि कोविड वार्ड कमरा नम्बर 103 में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि “किसी बड़े आदमी से फोन कराने पर ही वेंटिलेटर दिया जाएगा। बाद में हमने डीन ऑफ स्टूडेंट्स को फोन कर मदद मांगी तो उन्होंने मदद का आश्वासन दिया और फिर बाद में उन्होंने हॉस्पिटल के एम.एस. डॉ एस.के. माथुर से बात करने की बात कही। डॉ एस के माथुर से बात करने पर उन्होंने मदद करने में कोई इच्छा शक्ति नहीं दिखाई और बाद में कई बार फ़ोन करने पर फोन ही रिसीव नहीं किया।बाद हमने कई बार कार्यकारी-कुलपति को भी फोन मिलाया लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। करीब 4 घण्टे तक अभय जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ता रहा।”
अभय की मौत क्या कोरोना के डर की वजह से लगने वाले भीड़ से हुई? आखिर कोरोना का डर क्यों फैलाया जा रहा है? जागरूक करने की बजाय मीडिया द्वारा डर का माहौल पैदा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे में पैसे वाले हल्के लक्षण रहने पर भी हावी हो जाते हैं और आम जनमानस गंभीर लक्षण होने पर भी सुविधाविहीन रह जाता है और अंतः ईश्वर के चरण में शरण लेता है।
अगर बात करें इस व्यक्ति की जिसने हर रात गरीबो का पेट भरा है, लोगों को भूख से मरने नहीं दिया लेकिन खुद कोरोना से मर गया। जी हां! आल इंडियन रोटी बैंक के संस्थापक किशोरकांत तिवारी।
साल 2017 में आल इंडिया रोटी बैंक की स्थापना करने वाले और गरीब मज़दूरों में रोटी वाले भैया के नाम से मशहूर किशोरी कांत तिवारी का गुरुवार पूर्वाह्न को कोरोना से निधन हो गया। पिछले दिनों तेज़ बुखार की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया था। 5 दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया साइड फेसबुक पर लाइव आकर शहरवासियों से सतर्कता बरतने को कहा था।
तबियत बिगड़ने पर मंगलवार की देर रात वाराणसी के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शंकर तिवारी की पहल पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनकर उनके करीबियों में शोक की लहर फ़ैल गयी है।
किशोरी कांत तिवारी सासाराम, बिहार के रहने वाले थे और साल 2012 में पेट में प्रॉब्लम होने के बाद मां और पिता के साथ वाराणसी में बीएचयू में इलाज के लिए पहली बार बनारस आये थे। किशोरी कान्त सासाराम से इंग्लिश से ग्रेजुएशन करने के बाद 2009 से 2012 तक हैदराबाद में एक कंपनी में सेफ्टी ऑफिसर का जॉब भी कर चुके थे।
इसके बाद इलाज के दौरान वाराणसी में रुक कर किशोरकान्त तिवारी महेशनगर में बच्चों को कोचिंग पढ़ाने लगे। साल 2017 में अस्सी घाट के पास एक डोसा कार्नर के बगल में एक व्यक्ति के कूड़े में से डोसा निकालकर खाने को देखकर उन्होंने ऑल इंडिया रोटी बैंक की स्थापना की थी। इस बैंक ने पिछले वर्ष कोरोना विभीषिका में लाकडाउन के दौरान लाखों लोगों को दो वक़्त की रोटी मुहैया करवाई।
बता दें कि किशोरी कान्त तिवारी की आंत में ट्यूमर था जिसका बेल्लूर में साल 2016 में ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद उन्हें सांस लेने में अक्सर दिक्कत होती थी और उन्हें इन्हेलर लेना पड़ता था।
शुरू कराई थी नेक पहल
भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए एक नेक पहल शुरू की थी,लोगो से सोशल मीडिया के माध्यम और जगह कह मिलने वाली लोगो से कहा करते थे अगर आपके घर कोई भी कार्यक्रम हो तेरहवीं, शादी-विवाह,बर्थडे पार्टी या किसी भी कार्यक्रम में बचे खानों से किशोर गरीब का पेट भरते थे।
पिछले वर्ष जब कोरोनाकाल चल रहा तब एक जगह रसोई बना के लोगो के सहयोग रोटी बैंक संचालित कर रहे थे किशोर कांत तिवारी।
एक तरफ देश का भविष्य अभय और दूसरी तरफ़ गरीबों का अन्नदेव किशोरकान्त। इन दोनों लोगों की मौत से पूर्वांचल ही नही अपितु पूरे देश को सबक लेना चाहिए। पर अफसोस यहां लेखक के शब्द बिखर जाते हैं…..