सारस के नवजीवन के लिए नवभूमी….

रिपोर्ट: डाँ.एस.बी.एस.चौहान

नमभूमि उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी संरक्षित सारस का प्राकृतिक घर है आओ हम सब मिलकर इन्हें नष्ट होने से बचायें

-आज के मनाए जा रहे पक्षी दिवस में राजकीय पक्षी सारस का भी एक अपना अभूतपूर्व स्थान है

-सारस विश्व का सबसे विशाल उड़ने वाला पक्षी है इस पक्षी को क्रौंच के नाम से भी जानते हैं

-शिकारी द्वारा सारस के जोड़े में से एक को मार देने पर दूसरा प्राणी स्वत: प्रांण त्याग देता है या यूं कहें जीवित नहीं रह सकता इस बात का उल्लेख रामायण में भी है: महर्षि वाल्मीकि

-उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा-मैनपुरी में बहुत बड़ी संख्या में सारसों की उपस्थिति देखी जाती है व इन का शिकार करना वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत कड़ी कार्यवाही सहित सजा का प्रावधान है: डॉ आशीष त्रिपाठी वन्यजीव विशेषज्ञ

चकरनगर/इटावा। सारस विश्व का सबसे विशाल उड़ने वाला पक्षी है इस पक्षी को क्रोंच के नाम से भी जानते हैं। पूरे विश्व में भारतवर्ष में इस पक्षी की सबसे अधिक संख्या पाई जाती है सबसे बड़ा पक्षी होने के अतिरिक्त इस पक्षी की कुछ अन्य विशेषताएं इसे विशेष महत्व देतीं हैं। उत्तर प्रदेश के इस राज्यकीय पक्षी को मुख्यतः गंगा के मैदानी भागों और भारत के उत्तरी और उत्तरी पूर्वी और इसी प्रकार के समान जलवायु वाले अन्य भागों में देखा जा सकता है। भारत में पाए जाने वाला सारस पक्षी यहां के स्थाई प्रवासी होते हैं और एक ही भौगोलिक क्षेत्र में रहना पसंद करते हैं। सारस पक्षी का अपना विशिष्ट सांस्कृतिक महत्व भी है। सांस्कृतिक महत्व पर जब दृष्टि डालते हैं तो मुझे याद आता है कि महर्षि वाल्मीकि जी ने विश्व के प्रथम ग्रंथ रामायण की प्रथम कविता का श्रेय सारस पक्षी को दिया है। रामायण का आरंभ एक प्रणयरत सारस युगल के वर्णन से होता है। प्रातः काल की बेला में महर्षि वाल्मीकि इसके दृष्टा है, तभी एक आखेटक द्वारा इस जोड़े में से एक की हत्या कर दी जाती है जोड़े का दूसरा पक्षी इसके वियोग में प्रांण दे देता है महर्षि उस आखेटक को श्राप देते हैं

“मां निषाद प्रतिष्ठांत्वमगम: शाश्वती: समा:।
यत् क्रौंचमिथुनादेकं वधी: काममोहितम् ।।

अर्थात हे निषाद तुझे निरंतर कभी शांति ना मिले तूने इस क्रौंच के जोड़े में से एक की जो काम से मोहित हो रहा था, बिना किसी अपराध के हत्या कर डाली यह जघन्य अपराध रामायण में भी माना गया है। शायद इसी से प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस दिवस पर सारस को महत्वपूर्ण स्थान देते हैं। नम भूमि वे भूमि है जिनमे वर्ष भर में लगभग 7 से 8 महीने पानी भरा रहता है। ये नमभूमि (वेटलैंड्स) ही हमारे उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी संरक्षित सारस का घर भी है आओ हम सब मिलकर इन्हें नष्ट होने से बचायें । क्या आप जानते है कि, उत्तर प्रदेश का गौरव हमारा राज्य पक्षी (ग्रस एन्टीगोन एन्टीगोन) बहुत अच्छा किसान मित्र होने के साथ ही एक नॉन माइग्रेटरी प्रजाति है जो कि, उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा व मैनपुरी क्षेत्र में बहुत बडी संख्या मे देखी जाती है । सारसों के संरक्षण पर शोध कार्य से जुडी संस्था ओशन के महासचिव, पर्यावरणविद एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ आशीष त्रिपाठी के अनुसार- सारस क्रेन की प्रजाति सहित विश्व भर में वन्यजीवों की अन्य लाखों प्रजातियों का वैश्विक डाटा रखने वाली एक मात्र संस्था आईयूसीएन के द्वारा जारी रेड डेटा बुक में शामिल हमारा सारस एक संरक्षित पक्षी भी है जिसके अवैध शिकार या किसी भी तरह से इसे सताये जाने पर वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत कड़ी कार्यवाही सहित सजा का प्रावधान भी है। वर्ग एवीज की सबसे बड़ी उड़ने वाली प्रजातियो में सारस सर्वाहारी प्रजाति है व छोटे बड़े क्रशटेशियन्स, एनिलिडस ,कीड़े मकोड़े,घोंघे,मेढ़क खाकर प्रकृति में कीड़े मकोड़ो की संख्या पर नियंत्रण करता है। यह विशाल पक्षी लगभग 1.8 मीटर तक ऊँचा होता है जो कि,अक्सर खुले नमभूमि क्षेत्रों सहित धान के खेतों में अपना आशियाना बनाने के उद्देश्य से भोजन ढूंढता व घोंसला बनाता दिखाई देता है। सिलेटी रंग का लम्बी सफेद मिक्स गर्दन व लाल व सिलेटी सिर व काली सिलेटी चोंच वाला ग्रुईडेई फ़ैमिली का सदस्य अपने मेटिंग काल मे अपनी लम्बी गर्दन के स्ट्रनिंग रीजन से एक तेज ट्रमपेटिंग कॉल निकाल कर अपने मेटिंग एक दूसरे के सामने नृत्य कर एक दूसरे से प्रणय निवेदन करते है व एक दूसरे के चारों ओर भी घूमते है। जोड़े बनाने व मेटिंग के बाद मानसून सत्र में जून से सितम्बर के मध्य इनका मुख्य ब्रीडिंग सीजन होता है,तब ही ये अंडे देते है और एक बड़ा घोंसला ज्यादातर धान के खेतों के निकट कीचड़ व उथले पानी युक्त नम भूमि में बनाते है जो पानी मे एक छोटे से द्वीप (लैगून) जैसा दिखता है। इनके घोसले का आकार लगभग 2 मीटर चौड़ा व पानी से लगभग 1 मीटर तक ऊँचा हो सकता है। सामान्यतयः इनके घोंसले में एक या दो ही अंडे दिखाई देते है मुख्यतयः मादा द्वारा अंडों को व कभी कभी दौनो नर मादा द्वारा बारी बारी से अंडों को सेते हुये देखा गया है। अंडों के इन्क्यूबेशन (सेने) का समय एक माह या उससे (30 से 34 दिन) भी हो सकता है। उसके बाद ही अंडों से बच्चे बाहर आते है। इनका जीवन काल 40 से 45 वर्ष तक वजन 4 से 7 किलो तक व इनके पंखों का आकार 250 इंच तक होता है। नर सारस आकार में मादा से कुछ बड़ा होता है। इनके अंडों को शिकारी कुत्तों व कौवों ब्राह्मी काईट से विशेष रूप से खतरा होता है। अक्सर ही जागरूकता की कमी से इनके घटते प्राकृतिक वास सहित भोजन की कमी व रासायनिक केमिकल के प्रयोगों से, बिजली के तारों में उलझकर मरने, वेटलैंड्स में गर्मियों में पानी की कमी व कभी अवैध शिकार से भी इनकी जनसंख्या कभी कभी प्रभावित होती रहती है। चूंकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित हमारा राज्य पक्षी सारस हम सबकी एक अमूल्य धरोहर भी है अतः इस पक्षी के संरक्षण में सभी पूरा सहयोग करें व प्रकृति का आनंद लें। वन्यजीवों से अद्वितीय प्रेम रखने वाले प्रशांत सिंह उर्फ श्याम जी बताते हैं कि आज के समय में सारस जो हमारे कछार/ यमुना की तलहटी में धान और गेहूं की फसल हरी-भरी में दिखाई देते थे और फिर ऊपर से काले बादल हों तो उस छटा का वर्णन करना मेरे पास शब्दों का अभाव है, क्या सुंदरता प्राकृत की झलकती है जिसे देखने के लिए आंखें लालायित होतीं हैं पर आज यह राजकीय पक्षी का भी अवनयन की ओर इशारा हो रहा है जो इनके रखरखाव हेतु समस्या पैदा करता है।

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