पश्चिम बंगाल (West Bengal, India) के मालदा जिले में इलेक्शन ऑब्जर्वरों को बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और उन्हें खाना-पानी तक नहीं दिया गया। कोर्ट ने इसे सुनियोजित और भड़काऊ घटना करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना प्रतीत होता है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी:
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल थे, ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था के पूरी तरह चरमराने का संकेत देती हैं।
अधिकारियों से मांगा जवाब:
बेंच ने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस मामले में उनकी निष्क्रियता पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम:
घटना 1 अप्रैल की दोपहर करीब 2 बजे की है, जब सात इलेक्शन ऑब्जर्वर मालदा के माताबारी स्थित बीडीओ ऑफिस पहुंचे थे। ये अधिकारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे। जैसे ही उनके पहुंचने की जानकारी स्थानीय लोगों को मिली, हजारों की संख्या में लोग वहां इकट्ठा हो गए।
वोटर लिस्ट विवाद बना कारण:
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वोटर लिस्ट से उनके नाम हटाए जा रहे हैं। इसी के विरोध में उन्होंने बीडीओ ऑफिस का घेराव कर लिया और अधिकारियों को बाहर निकलने नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि वे अपनी बात सीधे अधिकारियों के सामने रखें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
नौ घंटे तक बंधक रहे अधिकारी:
प्रदर्शन के दौरान सभी सातों अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक अंदर ही रोके रखा गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और सुरक्षा के बीच अधिकारियों को बाहर निकाला गया। हालांकि, बाहर निकलते समय भी प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोकने की कोशिश की।
वाहन पर भी हुआ हमला:
जब अधिकारियों को सुरक्षित बाहर ले जाया जा रहा था, तब उनके वाहन पर ईंटों से हमला किया गया। इस हमले में गाड़ी के शीशे टूट गए। हालांकि पुलिस की मौजूदगी के कारण अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
राज्य में जारी है SIR प्रक्रिया:
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया अभी भी जारी है। 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में करीब 7.04 करोड़ नाम शामिल थे, जबकि लगभग 60 लाख नामों को जांच के दायरे में रखा गया है। इन मामलों के निस्तारण के लिए 705 न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।
चुनावी प्रक्रिया पर असर की आशंका:
इस घटना को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र की मूल संरचना को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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