रिपोर्टर: अंकित दुबे
गाज़ीपुर/बहरियाबाद। पूर्ति संस्थान गाज़ीपुर के सहयोग से UP युवा परियोजना के तहत भारतीय संविधान के संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समानता को केंद्र में रखते हुए बहरियाबाद क्षेत्र में एक दिवसीय युवा महोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम रविवार, 14 दिसंबर 2025 को आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की सहभागिता देखने को मिली। आयोजन का मुख्य उद्देश्य संविधान की मूल भावना को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना और सामाजिक समरसता के विचार को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत तथागत भगवान बुद्ध और बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद पूर्ति संस्थान के निदेशक श्याम नारायण ने मंच से उपस्थित अतिथियों, ग्रामीण महिलाओं और युवा मंडल के सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान समानता, न्याय और स्वतंत्रता का मार्गदर्शक है और युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे इन मूल्यों को समझकर समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनें।
संविधान की मूल भावना पर जोर:
मुख्य अतिथि जखनिया विधायक बेदी राम ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान ने देश के हर नागरिक को स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। संविधान के मूल्यों को अपनाकर ही समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संविधान को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने व्यवहार और जीवन में उतारें।
प्रस्तावना को बताया संविधान की आत्मा:
विशिष्ट अतिथि धनंजय राय, अध्यक्ष स्पीड संस्थान बलिया और UP युवा परियोजना के मेंटर ने संविधान की प्रस्तावना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैसे शरीर को संचालित करने के लिए आत्मा आवश्यक होती है, वैसे ही संविधान की प्रस्तावना पूरे संविधान की आत्मा है। प्रस्तावना में निहित आदर्श ही भारत को एक सशक्त और जीवंत लोकतंत्र बनाते हैं।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जागरूकता:
युवा महोत्सव के दौरान युवा मंडल के सदस्यों ने संविधान के मूल्यों पर आधारित गीत, संगीत, नुक्कड़ नाटक, भाषण और पोस्टर प्रदर्शनी प्रस्तुत की। इन सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक समानता, अधिकार और कर्तव्यों का संदेश प्रभावी ढंग से दिया गया। प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि संविधान केवल पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में लाने की आवश्यकता है।
महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी:
कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्र से आई महिलाओं और युवाओं की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। मधुमती, सरिता भारती, सुमन भारती, सुनिधि राव, सुगंध, वर्षा, सुप्रिया, अजय हिमाचल, पूनम भारत, अमन, डॉ. विजय और संजय भास्कर सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने अपने विचार साझा किए। गीत-संगीत की प्रस्तुतियों में मुद्रिका गौतम, मुन्नालाल बागी और पूरी संस्कृत टीम ने संवैधानिक मूल्यों पर आधारित प्रभावशाली कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
सफल आयोजन पर आभार व्यक्त:
कार्यक्रम के समापन अवसर पर पूर्ति संस्थान की ओर से श्रद्धा श्याम नारायण ने सभी अतिथियों, ग्रामीण महिलाओं, सांस्कृतिक टीम, मीडिया प्रतिनिधियों और कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता हीरालाल और संजय भास्कर ने संयुक्त रूप से किया।
यह युवा महोत्सव संविधान और सामाजिक समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सामने आया, जिसने युवाओं को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग होने की प्रेरणा दी।
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