क्या महिलाओं ने बदल दी बिहार की सियासत?

बिहार में इस बार मतदान ने नया इतिहास रचा है। पहली बार राज्य में 67% मतदान दर्ज किया गया, जिसमें पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने 9% ज्यादा वोट डाले। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 5 लाख अधिक महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय साबित हुआ है। एग्जिट पोल्स (Exit Polls) के अनुसार, NDA गठबंधन 243 में से 154 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और सरकार बनाती नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश सरकार की यह मजबूती महिला वोटर्स की भूमिका के कारण संभव हुई है।

महिला मतदाताओं का प्रभाव बढ़ा:
1962 के बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं और पुरुषों के मतदान प्रतिशत में लगभग 23% का अंतर था। लेकिन अब यह अंतर पूरी तरह मिट चुका है। पिछले तीन चुनावों—2010, 2015 और 2020—में लगातार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा। 2020 के चुनाव में 243 में से 167 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले थे।

NDA को महिला वोटर्स का बड़ा फायदा:
2020 के चुनाव में NDA को कुल 1 करोड़ 57 लाख 2 हजार 650 वोट मिले, जबकि महागठबंधन को 1 करोड़ 56 लाख 91 हजार 500 वोट हासिल हुए। यानी NDA को महागठबंधन से केवल 11,250 वोटों की बढ़त मिली थी। लेकिन इन वोटों में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रही। उस वर्ष 2.08 करोड़ महिलाओं ने वोट डाले, जिनमें से 38% ने NDA को और 37% ने महागठबंधन को समर्थन दिया। इस प्रकार NDA को 2.08 लाख ज्यादा महिला वोट मिले, जिससे कई सीटों पर निर्णायक अंतर बना।

महिला मतदाताओं से तय हुआ जीत का समीकरण:
243 सीटों में से जिन 167 पर महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया, उनमें से 92 सीटें NDA के खाते में गईं। यानी 55% से ज्यादा सीटों पर महिला वोटर्स का प्रभाव NDA के पक्ष में रहा। JDU की जीती हुई 43 सीटों में से 37 सीटों पर महिलाओं ने अधिक वोट डाले थे, जबकि BJP की 74 सीटों में से 55 सीटों पर यही स्थिति रही।

NDA का महिला केंद्रित एजेंडा:
NDA सरकार ने चुनाव से पहले महिलाओं को लुभाने के लिए कई योजनाएं लागू की थीं। 1.21 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपए दिए गए। स्कूली छात्राओं के लिए साइकिल और यूनिफॉर्म जैसी योजनाएं चलाई गईं। पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया। 2016 में घरेलू हिंसा रोकने के लिए शराबबंदी लागू की गई। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35% आरक्षण दिया गया, जिसे जुलाई 2025 में केवल बिहार की महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया। अगस्त 2025 में शुरू हुई महिला रोजगार योजना (Mahila Rozgar Yojana) के तहत भी लाखों महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाया गया।

महागठबंधन के महिला वादे:
महागठबंधन (Mahagathbandhan) की ओर से तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने महिलाओं के लिए कई बड़े वादे किए। उन्होंने घोषणा की कि अगर सरकार बनी तो हर महिला को हर साल 30 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा, जीविका दीदियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा और 30 हजार रुपए मासिक सैलरी देने की बात कही गई। भूमिहीनों को दी जाने वाली जमीन का मालिकाना हक महिलाओं को देने, विधवाओं और बुजुर्गों की पेंशन को 1500 रुपए प्रति माह करने तथा छात्राओं को स्कॉलरशिप देने जैसे वादे किए गए।

अन्य राज्यों में भी महिला वोटर्स की भूमिका:
नवंबर 2023 से अब तक 13 राज्यों में हुए चुनावों में से 10 राज्यों में महिलाओं के लिए कैश स्कीम लागू की गई या उसका वादा किया गया। इनमें से 9 राज्यों में वही पार्टियां सत्ता में लौटीं, जिन्होंने महिलाओं को आर्थिक सहायता दी। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड में ऐसी योजनाओं ने निर्णायक भूमिका निभाई। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में चुनाव से 8 महीने पहले शुरू हुई “मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना (Mukhyamantri Ladli Bahna Yojana)” के तहत महिलाओं को 6 किस्तों में 11 हजार रुपए दिए गए, और BJP ने वहां फिर से सत्ता हासिल की।

महिलाओं की बदली प्राथमिकता:
बिहार में महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी और उनके निर्णायक वोट ने यह साबित कर दिया है कि अब राज्य की राजनीति बिना महिला वोटर्स के संभव नहीं है। नीतीश सरकार की नीतियों और योजनाओं ने महिलाओं में विश्वास पैदा किया, जिसने इस बार के चुनाव में NDA की वापसी सुनिश्चित की।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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