बांदा जेल में सजा काट रहे मुख्तार अंसारी की मौत के बाद मुख्तार का शव शुक्रवार की देर रात गाजीपुर लाया गया। इसके बाद शनिवार की सुबह घर से मुख्तार का जनाजा उठा तो हजारों की संख्या में लोग जनाजे में शामिल हुए। इस दौरान गाजीपुर की डीएम से मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी की तीखी बहस का एक वीडियो सामने आया है। इसके बाद क्या था #GhazipurDM #जिलाधिकारी ट्विटर यानि जिसे आज कल x कहते हैं उस पर ट्रेंड करने लगा. अब डीएम आर्याका अखौरी प्रशासनिक अधिकारी हैं. आईएएस हैं. उनको इस तरह से ट्रोल करना शायद उचित नहीं है. अब जो भी बहस हुई गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी और गाजीपुर की जिलाधिकारी के बिच उस पर उन दोनों लोगों को ही सोचना होगा. दोनों एक सम्मानित पद पर हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर यूजर ने हद ही कर दिया.
एक यूजर ने लिखा ये वही डीएम हैं जिसने RO-ARO पेपर लीक का मुद्दा उठाने वाले बच्चों पर FIR दर्ज कर उनका करियर बर्बाद कर दिया था. एक ने लिखा की फैमिली में 5 लोग हैं क्या एक साथ बैठ कर सहरी कर सकते हैं या धारा 144 लगा है तो आपसे परमिशन लेना पड़ेगा? वही एक यूजर लिखता है फैमिली में 18 लोग हैं क्या एक साथ बैठकर खाना खा सकते हैं या धारा 144 लगा है इसलिए आपसे परमिशन लेनी पड़ेगी? वहीँ एक यूजर ने लिखा कि ब्रेव गाजीपुर डीएम इज वैरी स्ट्रोंग ऑफिसर , गुंडों को ठीक से हैंडल कर लेती हैं. इक यूजर लिखता है कि एक अकेली शेरनी हजारों की भीड़ पर भारी. एक दूसरा यूजर लिखता है कि सब के सब अपने आका को खुश करने में मस्त हैं बताये ये जनाजे पर जाने पर FIR है. अब इस यूजर को देखिये ये लिखते हैं कि लाखों कि भीड़ बताती है कि मुख़्तार माफिया नहीं गरीबों का साथ देने वाला था, जो जिलाधिकारी इन लोगों पर केस करने कि बात कर रही हैं उन्हें ये देखना चाहिए. वहीँ एक यूजर लिखता है कि हेलो डीएम गाजीपुर मेरे गाँव में आज भी स्वक्ष भारत मिशन के तहत शौचालय नहीं बने हैं लोग सुबह सुबह खेतों में जाते हैं संख्या ज्यादा हो जाती है, धारा 144 लगी हुई है कृपया सुबह कि नित्य क्रिया के लिए परमिशन देने का कष्ट करें.
अब कमेंट करने वालों ने तो कमेंट कर दिया. लेकिन क्या कमेंट करने से पहले आपने जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के बारे में जाना? गाजीपुर जिले में 20 सितंबर 2022 को जिलाधिकारी के पद पर कार्यभार संभालने वाली आर्यका अखौरी अपने एक्शन को लेकर हमेशा चर्चा में रही हैं। हाल ही में महाहर धाम के पास बस में आग लगने से पांच लोगों की मौत की घटना के दौरान डीएम ने मौके पर लोगों के बीच पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल कर आवश्यक कार्रवाई की।

गैंगस्टर की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा में रही हैं अखौरी
पहली बार नहीं है जब डीएम आर्यका अखौरी ऐसे किसी नामी चेहरों के साथ भीड़ी हों। इससे पहले वह भदोही में गैंगस्टर और हथियार पर अपनी कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहीं। उन्होंने भदोही जिले में पूर्व विधायक विजय मिश्र के खिलाफ गैंगस्टर लगाने के साथ ही उनके कई असलहों का लाइसेंस निरस्त करने समेत कानून व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख रखा था। आर्यका गाजीपुर में मुख्तार अंसारी के खिलाफ भी कार्रवाई करती रही हैं।
अफजाल की पत्नी ने दायर किया था अवमानना केस
सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी ने जिलाधिकारी गाजीपुर आर्यका अखौरी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवमानना केस दायर किया था। कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत सीज (जब्त ) पेट्रोल पंप याची को चलाने की अनुमति देने का निर्देश दिया था और कहा था कि पेट्रोल पंप का अलग हिसाब रखा जाय,जिसे गैंगस्टर कोर्ट में पेश किया जाय। इस आदेश की सूचना देने के बावजूद पालन न करने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा भी अंसारी परिवार के खिलाफ कई कार्रवाइयों में भी उन्होंने बड़े निर्णय लिए.
अधिकारियों के जींस पहनकर ऑफिस आने पर लगा दी थी रोक
भदोही जिले में डीएम रहने के दौरान कर्मचारियों-अधिकारियों के जींस और टीशर्ट पहन कर कार्यालय में आने पर रोक लगा दी थी। भदोही जिले में उन्होंने अपनी तैनाती के समय टी शर्ट और जींस पैंट को प्रशासनिक अधिकारियों में बैन करने समेत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देकर उन्होंने सुर्खियां बटोरी थीं।
बिहार की रहने वाली हैं आर्यका अखौरी
आर्यका अखौरी मूलरूप से बिहार की रहने वाली हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी की शिक्षा हासिल की है। दिल्ली में ही संघ लोक सेवा आयोग (upsc) की तैयारी की थी। 2013 बैच की आईएएस आर्यका अखौरी का जिलाधिकारी के तौर पर पहला कार्यकाल भदोही में बीता है। इसके बाद दूसरी नियुक्ति गाजीपुर में हुई। इससे पहले वह बतौर उप जिलाधिकारी वाराणसी में 2015-16 में तैनात थीं। उसके बाद मेरठ की सीडीओ और लखनऊ में विशेष शिक्षा सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
किसी मुद्दे के लेकर दो पक्ष हो सकते हैं लेकिन एक प्रशासनिक अधिकारी पर कमेंट करना क्या उचित है ? सबकी अपनी जिम्मेदारियां हैं. नेता अपना काम करता है और अधिकारी अपना. देश में संविधान और कानून है उस का उलंघन चाहे एक सांसद करे या प्रशासनिक अधिकारी या आम जनता. कानून सब के लिए एक है और एक विकल्प कोर्ट है. तो आप सबका सम्मान करें बाकि कानून है वो अपना काम कर लेगा.

