सुवेंदु अधिकारी का ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस, कोयला घोटाला आरोपों पर 72 घंटे में जवाब की मांग

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में एक बार फिर तीखा टकराव सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को कानूनी नोटिस भेजकर सियासी माहौल गरमा दिया है। नोटिस में ममता बनर्जी से 72 घंटे के भीतर अपने आरोपों के ठोस सबूत पेश करने की मांग की गई है। सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर सबूत नहीं दिए गए, तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस और बयानबाजी को जन्म दे दिया है।

कानूनी नोटिस में क्या कहा गया:
सुवेंदु अधिकारी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले हैं। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि सार्वजनिक मंच से इस तरह के बयान बिना प्रमाण के देना कानूनन गलत है। सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री अपने दावों को साबित करने में असफल रहती हैं, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

ममता के आरोपों की पृष्ठभूमि:
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) और सुवेंदु अधिकारी कोयला तस्करी मामले में शामिल हैं। उनका दावा था कि कथित कोयला घोटाले से जुड़ा पैसा सुवेंदु अधिकारी के जरिए अमित शाह तक पहुंचता है। यह बयान उन्होंने कोलकाता (Kolkata) में एक सार्वजनिक सभा के दौरान दिया था, जिसने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया।

ईडी की कार्रवाई के विरोध में बयान:
यह पूरा मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब ममता बनर्जी ने 8 जनवरी को I-PAC कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के विरोध में आयोजित सभा को संबोधित किया। इसी मंच से उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों पर निशाना साधा और कोयला तस्करी से जुड़े आरोपों को दोहराया। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उनके पास अमित शाह से जुड़े सबूत मौजूद हैं, जिनका जिक्र उन्होंने पेन ड्राइव के रूप में किया।

ईडी पर एफआईआर और मार्च:
मुख्यमंत्री ने प्रवर्तन निदेशालय के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज कराई हैं। इसके साथ ही उन्होंने कोलकाता में एक मार्च भी निकाला। इस मार्च के दौरान उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं और राज्य सरकार को निशाना बनाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि वह किसी भी तरह के दबाव से डरने वाली नहीं हैं और अपने अधिकारों की रक्षा करेंगी।

हाईकोर्ट में बढ़ा विवाद:
ईडी की तलाशी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) में याचिका दायर की गई थी। वहीं, ईडी ने भी ममता बनर्जी पर संवैधानिक पद के दुरुपयोग और अहम दस्तावेज जबरन ले जाने के आरोप लगाते हुए 28 पेज की याचिका दाखिल की। इस मामले की सुनवाई 9 जनवरी को जस्टिस शुभ्रा घोष की बेंच में होनी थी।

कोर्ट रूम में हंगामा:
सुनवाई से पहले ही कोर्ट रूम में भारी भीड़ जमा हो गई। जज ने अदालत कक्ष खाली करने के लिए समय दिया और केवल संबंधित वकीलों को मौजूद रहने का निर्देश दिया। इसके बावजूद वकीलों के बीच बहस बढ़ गई और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ते देख जज को बिना सुनवाई किए अदालत छोड़नी पड़ी और मामले की सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी गई।

रैली में ममता के अन्य बयान:
ममता बनर्जी ने अपनी रैली में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और मतदाताओं के अधिकारों से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।

राजनीतिक टकराव और आगे की राह:
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को और ज्यादा ध्रुवीकृत कर दिया है। एक तरफ सुवेंदु अधिकारी कानूनी कार्रवाई की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी अपने आरोपों पर कायम हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर अहम साबित हो सकता है।

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