चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन यानी एसआईआर (SIR) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी। इसके साथ ही देश के 12 राज्यों में एसआईआर का पहला चरण पूरा हो गया है। वोटर लिस्ट को दुरुस्त और अद्यतन करने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान 28 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था, जो करीब दो महीने 11 दिन तक चला। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का सत्यापन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।
एसआईआर से पहले 12 राज्यों में कुल 50.97 करोड़ मतदाता दर्ज थे, लेकिन वैरिफिकेशन के बाद यह संख्या घटकर 44.38 करोड़ रह गई। इस तरह करीब 6.59 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। यह आंकड़ा इन राज्यों के कुल मतदाताओं का 12.93 प्रतिशत है, यानी हर 100 मतदाताओं में से लगभग 13 नाम कट गए हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम सूची नहीं है और जिन मतदाताओं के नाम हटे हैं, उन्हें दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।
एसआईआर अभियान का उद्देश्य:
चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और सटीक बनाना है। इस प्रक्रिया में मृत मतदाताओं, डुप्लीकेट या फर्जी नामों और स्थान परिवर्तन कर चुके मतदाताओं की पहचान की गई। आयोग का कहना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी और गलत मतदाता पंजीकरण की शिकायतें कम होंगी।
ड्राफ्ट लिस्ट अभी अंतिम नहीं:
चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि नाम हमेशा के लिए हटा दिए गए हैं। जिन लोगों के नाम सूची से कटे हैं, वे फॉर्म 6 या फॉर्म 7 भरकर अपने नाम जुड़वा सकते हैं या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए अंतिम वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी।
राज्यों में कटे वोटर्स की स्थिति:
ड्राफ्ट लिस्ट में सबसे ज्यादा नाम उत्तर प्रदेश में काटे गए हैं। यहां हर 100 मतदाताओं में से करीब 19 के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसके मुकाबले लक्षद्वीप (Lakshadweep) में यह आंकड़ा सबसे कम रहा, जहां हर 100 में से केवल 3 मतदाताओं के नाम कटे हैं। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हर 100 में से 8, गुजरात (Gujarat) में 15 और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में 13 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए हैं।
राजस्थान में कटे 41.85 लाख नाम:
राजस्थान (Rajasthan) में एसआईआर की ड्राफ्ट लिस्ट में 41.85 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट से पहले राज्य में कुल 5.48 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि नई ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर 5.06 करोड़ रह गई। यहां कुल 7.6 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, यानी हर 100 में से लगभग 8 नाम कटे हैं। आयोग के आंकड़ों के अनुसार हटाए गए नामों में से 8.75 लाख मृत पाए गए, 3.44 लाख डुप्लीकेट या फर्जी थे और करीब 29.6 लाख मतदाता शिफ्ट, लापता या अन्य श्रेणी में आए।
उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी कटौती:
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में एसआईआर ड्राफ्ट लिस्ट में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट से पहले राज्य में 15.44 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि नई ड्राफ्ट लिस्ट में 12.55 करोड़ नाम शामिल किए गए हैं। यहां 18.72 प्रतिशत मतदाताओं के नाम कटे हैं, यानी हर 100 में से करीब 19 मतदाता सूची से बाहर हो गए। हटाए गए नामों में से 46.23 लाख मृत पाए गए, 25.47 लाख डुप्लीकेट या फर्जी थे, जबकि 2.17 करोड़ मतदाता शिफ्ट, लापता या अन्य कारणों से सूची से हटाए गए।
चुनाव आयोग की दलीलें:
चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची को वास्तविक और अद्यतन बनाया गया है। आयोग के मुताबिक बड़ी आबादी वाले राज्यों में शिफ्ट होने वाले मतदाताओं की संख्या अधिक होती है, जिसका असर ड्राफ्ट लिस्ट में साफ दिखाई देता है। आयोग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे ड्राफ्ट लिस्ट की जांच करें और जरूरत पड़ने पर समय रहते दावे और आपत्तियां दर्ज कराएं।
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