Delhi: भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई (BR Gavai) ने एक बार फिर राज्य सरकारों द्वारा की जा रही बुलडोजर कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की है। मॉरीशस (Mauritius) में दिए गए अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था कानून के शासन पर आधारित है, न कि बुलडोजर के डर पर। उन्होंने अपने उस ऐतिहासिक फैसले का भी उल्लेख किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने “बुलडोजर न्याय” की कड़ी आलोचना की थी।
कानून के शासन पर जोर:
CJI बीआर गवई (BR Gavai) ने अपने भाषण में कहा कि किसी अपराध के जवाब में आरोपी का घर या संपत्ति गिराना कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि यह कदम भारतीय संविधान (Indian Constitution) के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है, जो प्रत्येक नागरिक को जीवन और सम्मानपूर्वक रहने का अधिकार देता है। गवई ने कहा कि कोई भी सरकार एक साथ न्यायाधीश, जूरी और कार्यकारी नहीं बन सकती। ऐसा करना न केवल न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है बल्कि लोकतंत्र की आत्मा को भी कमजोर करता है।
संविधान की मूल संरचना पर चर्चा:
अपने संबोधन में बीआर गवई (BR Gavai) ने भारत के कई ऐतिहासिक निर्णयों का जिक्र किया। उन्होंने सबसे पहले 1973 के केशवानंद भारती केस (Kesavananda Bharati Case) का उल्लेख किया। यह वह फैसला था जिसमें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने संविधान की “मूल संरचना” को सुरक्षित रखने का सिद्धांत तय किया था। इस निर्णय के बाद संसद की संशोधन शक्तियों पर सीमा निर्धारित की गई और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को एक मजबूत आधार मिला।
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का रुख:
मुख्य न्यायाधीश ने अपने भाषण में तीन तलाक (Triple Talaq) से जुड़े सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के ऐतिहासिक निर्णय को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक नई उम्मीद जगाई। इस निर्णय ने सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर भी चर्चा:
CJI गवई (BR Gavai) ने अपने भाषण में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम (Electoral Bond Scheme) के मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह मामला भारत की चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक फंडिंग की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी नीतियों पर निगरानी रखे जो लोकतंत्र को प्रभावित कर सकती हैं।
न्याय का रास्ता ताकत नहीं, कानून से होकर गुजरता है:
मुख्य न्यायाधीश का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज है। उन्होंने दोहराया कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में न्याय की बुनियाद केवल कानून से तय होती है, न कि ताकत के प्रदर्शन से। उन्होंने कहा कि यदि कानून को दरकिनार कर कार्रवाई की जाएगी, तो यह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करेगा।
समापन में संदेश:
अपने भाषण के अंत में बीआर गवई (BR Gavai) ने कहा कि भारत का संविधान (Indian Constitution) केवल कागज का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक की गरिमा और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने सभी संस्थाओं से आग्रह किया कि वे न्याय के सिद्धांतों का पालन करें और लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत बनाएं।
मुख्य न्यायाधीश का यह वक्तव्य न केवल भारत की न्याय व्यवस्था के प्रति उनका गहरा विश्वास दिखाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि बुलडोजर से नहीं, बल्कि कानून के रास्ते से ही न्याय और व्यवस्था कायम रह सकती है।

