रिपोर्टर: अनुज कुमार
लखनऊ (Lucknow) में शिक्षा व्यवस्था को सुलभ, पारदर्शी और छात्रहितैषी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) ने सख्त कदम उठाए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय (Yogendra Upadhyay) ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों (State Universities) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश (Government Order) में निर्धारित दरों के अनुसार ही लिया जाए। शासनादेश के विपरीत अधिक शुल्क वसूलने पर ऑडिट कर कार्रवाई करने की चेतावनी भी जारी की गई है।
विश्वविद्यालयों में शुल्क वसूली की समीक्षा:
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) और संबद्ध महाविद्यालयों द्वारा फीस वसूली के मामलों की समीक्षा की। बैठक में विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
निर्देश और चेतावनी:
बैठक में मंत्री ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालयों को शासनादेश के अनुसार ही परीक्षा शुल्क लेना अनिवार्य है। यदि कोई विश्वविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली करता है, तो उसकी ऑडिट कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए ही सभी निर्णय लिए जाएं।
छात्रहित और शिक्षा का सुलभ होना:
मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नेतृत्व में सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि फीस में अनावश्यक वृद्धि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए शिक्षा प्राप्त करना कठिन बना देती है।
परीक्षा शुल्क का निर्धारण:
शासनादेश के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 800 रुपये, एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक, बायोटेक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1000 रुपये, तथा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर शुल्क तय किया गया है।
विश्वविद्यालयों की वित्तीय जिम्मेदारी:
उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि वे शासनादेशों का पूर्ण पालन करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। साथ ही नए पाठ्यक्रम शुरू करने, संसाधनों को मजबूत करने और संस्थानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में मौजूद अधिकारी और प्रतिनिधि:
बैठक में एमएलसी उमेश द्विवेदी (Umesh Dwivedi), अवनीश कुमार सिंह (Avneesh Kumar Singh), प्रमुख सचिव एम. पी. अग्रवाल (M.P. Agrawal), सचिव अमृत त्रिपाठी (Amrit Tripathi), कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय प्रो. जय प्रकाश सैनी (Prof. Jai Prakash Saini) सहित अन्य विश्वविद्यालय अधिकारीगण उपस्थित रहे।
सारांश:
योगी सरकार विश्वविद्यालयों को वित्तीय अनुशासन और छात्रहित के अनुरूप संचालन के लिए स्पष्ट निर्देश दे रही है। शुल्क वसूली में पारदर्शिता और शासनादेश का पालन सुनिश्चित कर शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने का प्रयास जारी है।
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