50 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत, UPTET में बैठने का रास्ता साफ, UPESSC ने किए 3 बड़े बदलाव

लखनऊ (Lucknow)। उत्तर प्रदेश में लगभग 50 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। अब वे यूपी टीईटी-2026 परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने मंगलवार को टीईटी से जुड़े नोटिफिकेशन और गाइडलाइंस में तीन महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक और अभ्यर्थी लाभान्वित होंगे।

नियमों में बदलाव से बड़ी संख्या में शिक्षक पात्र:
संशोधित नियमों के बाद उन शिक्षकों को भी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है, जिनके पास पहले टीईटी में शामिल होने की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब 50 हजार बताई जा रही है। पहले यह शर्त थी कि केवल ग्रेजुएशन और बीटीसी पास अभ्यर्थी ही परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन अब इसमें बदलाव किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का प्रभाव:
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के 1 सितंबर 2025 के फैसले से प्रभावित सभी सहायक अध्यापकों को अब टीईटी परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इसमें वे शिक्षक भी शामिल हैं, जो पूर्व में विभिन्न परिस्थितियों में नियुक्त हुए थे और आवश्यक शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं कर पाए थे।

प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों को भी राहत:
वे शिक्षक जो 1998 से पहले इंटरमीडिएट और बीटीसी के आधार पर नियुक्त हुए थे, या मृतक आश्रित के रूप में नौकरी पाकर बाद में सहायक अध्यापक बने, उन्हें भी इस संशोधन का लाभ मिलेगा। साथ ही 1999 से 2004 के बीच बीपीएड के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों को भी परीक्षा देने का मौका दिया गया है। ये सभी शिक्षक विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

बीएड और प्रशिक्षणरत छात्रों के लिए छूट:
आयोग ने एक और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए बीएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स कर रहे छात्रों को भी आवेदन करने की अनुमति दे दी है। पहले केवल अंतिम वर्ष के छात्र ही पात्र माने जाते थे, लेकिन अब अध्ययनरत छात्र भी आवेदन कर सकेंगे।

प्राथमिक स्तर पर बीएड अभ्यर्थियों को रोक:
नए नियमों के तहत बीएड अभ्यर्थियों को प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) की टीईटी परीक्षा से बाहर कर दिया गया है। अब वे केवल उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) की परीक्षा में ही शामिल हो सकेंगे। यह निर्णय न्यायालय और संबंधित संस्थाओं के निर्देशों के अनुसार लिया गया है।

चार साल बाद हो रही परीक्षा:
आयोग ने 20 मार्च को परीक्षा कार्यक्रम घोषित किया था। यह परीक्षा चार वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित की जा रही है। इस बार 15 से 20 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने का अनुमान है। इनमें लगभग 1.86 लाख ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं, जो अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं।

नौकरी पर मंडरा रहा था संकट:
इन शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यदि वे सितंबर 2027 तक टीईटी पास नहीं करते, तो उनकी नौकरी पर संकट आ सकता था। ऐसे में नए बदलाव उनके लिए राहत लेकर आए हैं और उन्हें एक और अवसर प्रदान करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के बाद बदलाव:
इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों की समस्याएं प्रमुखता से सामने आई थीं। इसके बाद आयोग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नोटिफिकेशन में संशोधन किया और पात्रता के दायरे को विस्तृत किया।

निष्कर्ष:
टीईटी-2026 के नियमों में किए गए ये बदलाव शिक्षकों और अभ्यर्थियों के लिए राहत भरे साबित होंगे। इससे न केवल बड़ी संख्या में शिक्षक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता भी बनी रहेगी।

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