- यूपी पुलिस एसआई, एलटी ग्रेड शिक्षक व प्रवक्ता भर्ती की देरी से लाखों अभ्यर्थी ओवरएज।
- अभ्यर्थियों का कहना – भर्ती समय पर न होने से भविष्य अंधकारमय।
- आयु सीमा में छूट की मांग को लेकर मुख्यमंत्री व आयोग को पत्र भेजे गए।
- कोविड काल की देरी और अनियमित भर्ती चक्र को वजह बताया जा रहा।
- प्रतियोगी छात्र संघ समिति ने कहा – नियमित भर्ती चक्र न होने से 4-10 साल इंतजार करना पड़ रहा है।
- 2021 के बाद से कई अभ्यर्थी ओवरएज हो गए, अब नई विज्ञप्तियों में शामिल नहीं हो पा रहे।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई), एलटी ग्रेड शिक्षक और प्रवक्ता भर्ती की प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी से लाखों प्रतियोगी छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। लंबे इंतजार और भर्तियों के न आने के कारण अब बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं और चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। यही कारण है कि अब वे सरकार और आयोग से आयुसीमा में छूट की मांग कर रहे हैं।
यूपीएसआई भर्ती का पिछला विज्ञापन वर्ष 2021 में आया था। इसके बाद लगभग तीन साल बीत जाने के बावजूद नया विज्ञापन जारी नहीं हुआ। इस बीच, तीन वर्ष की आयु छूट तो दी गई, लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि 2020-21 में ओवरएज होने वालों को इसका लाभ नहीं मिला। 2021 के बाद से 2022, 2023 और 2024 में भी लाखों उम्मीदवार आयुसीमा से बाहर हो चुके हैं।
प्रतियोगी छात्र संघ समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने कहा कि समय से भर्तियां न होने के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी ओवरएज हो रहे हैं। नतीजतन, उन्हें चार से दस साल तक इंतजार करना पड़ता है। यही वजह है कि अब युवाओं का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि कोविड महामारी के दौरान भर्तियां रुकने से भी उनका नुकसान हुआ। इस अवधि को देखते हुए सरकार को ओवरएज उम्मीदवारों को राहत देनी चाहिए। कई अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री और आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर आयुसीमा में कम से कम तीन वर्ष की अतिरिक्त छूट देने की मांग की है।
इसी तरह, एलटी ग्रेड शिक्षक और प्रवक्ता भर्ती में भी हजारों उम्मीदवारों की उम्र सीमा पूरी हो चुकी है। एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती का पिछला विज्ञापन वर्ष 2018 में आया था। अब छह साल बाद नया विज्ञापन जारी होने जा रहा है। प्रवक्ता भर्ती का आवेदन भी हाल ही में 12 अगस्त से शुरू हुआ है। लेकिन इन दोनों में आयुसीमा छूट का कोई प्रावधान न होने से हजारों उम्मीदवार बाहर हो जाएंगे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि सरकार भर्ती प्रक्रिया को नियमित अंतराल पर कराती, तो यह समस्या खड़ी नहीं होती। अब युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
भर्तियों की इस देरी ने न सिर्फ युवाओं का कीमती समय गंवाया है बल्कि लाखों सपनों को अधूरा भी छोड़ दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए आयुसीमा छूट पर कोई निर्णय लेती है या नहीं।