यूपी में 20 हजार आउटसोर्स भर्तियों की तैयारी, 426 करोड़ का बढ़ा बजट; 16 हजार न्यूनतम मानदेय तय

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में योगी सरकार चुनाव से पहले आउटसोर्स के माध्यम से 20 हजार से अधिक पदों को भरने की तैयारी में है। इस दिशा में बढ़ाए गए बजट को अहम संकेत माना जा रहा है। सरकार ने चालू बजट में 426 करोड़ रुपये की वृद्धि करते हुए कुल 2223.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चयनित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ देने के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली अधिकांश सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। न्यूनतम 16 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित किया गया है।

बजट में बड़ी बढ़ोतरी के संकेत:
बजट के आंकड़े बताते हैं कि आउटसोर्स भर्तियों और संबंधित व्यवस्थाओं पर व्यय लगातार बढ़ रहा है। इसी क्रम में इस बार 426 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है। सूत्रों के अनुसार, इस बजट से कम से कम 20 हजार पदों पर नियुक्तियां संभव हैं। पिछले आठ वर्षों में आउटसोर्स सेवा से जुड़े बजट में तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र में सरकार के बढ़ते फोकस को दर्शाती है। वर्ष 2019-20 से 2026-27 तक के आंकड़ों में निरंतर बढ़ोतरी स्पष्ट दिखाई देती है। यह वृद्धि केवल नई भर्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा शर्तों में सुधार, वेतन भुगतान की व्यवस्था और निगम संचालन से जुड़े खर्चों को भी शामिल करती है।

UPCOS के जरिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया:
प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं को देखते हुए सरकार ने हाल ही में यूपी आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) का गठन किया है। पहले विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से ठेके पर नियुक्तियां की जाती थीं, जिनमें वेतन में देरी, मानदेय में कटौती और सुविधाओं के अभाव जैसी शिकायतें सामने आती थीं। अब निगम के माध्यम से सभी रिक्त पदों पर पारदर्शी तरीके से भर्ती की जाएगी। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान:
आउटसोर्स पदों पर आरक्षण को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। नई व्यवस्था में अनुसूचित जाति (SC) को 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) को 2 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इस प्रावधान से सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप चयन प्रक्रिया लागू करने की बात कही गई है।

कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं:
निगम के अंतर्गत नियुक्त कर्मियों को न्यूनतम 16 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। वेतन सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित होगा, जिससे किसी प्रकार की मध्यस्थ कटौती की संभावना समाप्त होगी। इसके अलावा प्रॉविडेंट फंड, मेडिकल अवकाश, मातृत्व अवकाश और अन्य अवकाश सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। कैशलेस इलाज की सुविधा भी प्रस्तावित है, जो स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भर्ती प्रारंभिक तौर पर तीन वर्षों के लिए होगी, हालांकि सेवा शर्तों को पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाने की बात कही गई है।

निगम का गठन और प्रशासनिक व्यवस्था:
कैबिनेट की मंजूरी के बाद निगम का पंजीकरण कंपनी एक्ट के तहत एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में किया गया है। 2003 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृता सोनी को प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। वह वर्तमान में मुख्य सचिव की प्रमुख स्टाफ अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं और अतिरिक्त प्रभार में निगम की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। निगम का कार्यालय पिकअप भवन में तैयार किया जा रहा है। सभी विभागों से रिक्त पदों का विवरण मांगा गया है और जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर स्थिरता मिलेगी, वहीं प्रशासनिक कार्यों में भी दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।


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