यूपी की प्राचीन पांडुलिपियों को मिलेगा डिजिटल अवतार, दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण शुरू

उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों को सुरक्षित करके डिजिटल रूप देने का बड़ा कदम उठाया है। इस पहल से न केवल राज्य बल्कि देशभर के शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को ज्ञान की समृद्ध परंपरा तक आसान पहुंच मिलेगी। प्रदेश सरकार ने जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित करने और संग्रहीत करने के लिए सभी जिलों में आदेश जारी किए हैं। इसके तहत मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो इस अभियान की निगरानी करेंगे।

‘ज्ञान भारतम मिशन’ का उद्देश्य:
उत्तर प्रदेश में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण करना ‘ज्ञान भारतम मिशन’ का मुख्य उद्देश्य है। मिशन के माध्यम से शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को यह ग्रंथ डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जाएंगे।

जिला स्तर पर कार्यप्रणाली:
गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी और सार्वजनिक पुस्तकालयों, और व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों और हस्तलिखित ग्रंथों की पहचान की जाएगी। इनमें ताड़पत्र, भोजपत्र और अन्य प्राचीन दस्तावेज भी शामिल होंगे। 75 वर्ष से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के माध्यम से प्रदेश के राजकीय अभिलेखागार को भेजी जाएगी, जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग के बाद डिजिटल रूप दिया जाएगा।

संग्रहकर्ता के अधिकार सुरक्षित:
इस मिशन की खासियत यह है कि डिजिटलीकरण के बाद भी पांडुलिपियों का अधिकार मूल संग्रहकर्ता या संस्था के पास रहेगा। सरकार केवल डिजिटल प्रकाशन कर उन्हें विश्व पटल पर प्रस्तुत करेगी। इस प्रक्रिया से न केवल ग्रंथ सुरक्षित रहेंगे बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बौद्धिक विरासत का प्रसार भी संभव होगा।

विरासत संरक्षण की दिशा में कदम:
पिछले वर्षों में कई दुर्लभ ग्रंथ रखरखाव की कमी के कारण नष्ट होने की कगार पर थे। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत अब उन्हें सुरक्षित किया जाएगा और आने वाली पीढ़ियों तक यह विरासत संरक्षित रहेगी। इस पहल से न केवल शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारतीय ज्ञान और संस्कृति की वैश्विक पहचान भी मजबूत होगी।

डिजिटल पोर्टल से सुलभता:
डिजिटलीकरण के बाद पांडुलिपियां ‘ज्ञान भारतम’ पोर्टल के माध्यम से आमजन के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। शोधार्थी और विद्यार्थी आसानी से इन ग्रंथों का अध्ययन कर सकेंगे। इस मिशन से उत्तर प्रदेश में संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा मिलेगी।

सहयोग और निगरानी:
जिला स्तर पर पांडुलिपियों की पहचान और संग्रह प्रक्रिया के लिए प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। यह अधिकारी स्थानीय स्तर पर पांडुलिपियों की सूची तैयार करेंगे और संग्रहकर्ताओं से संपर्क साधेंगे। इस अभियान में उच्च गुणवत्ता की डिजिटल प्रतियां तैयार करने के लिए तकनीकी सहयोग भी सुनिश्चित किया गया है।

उम्मीद और महत्व:
‘ज्ञान भारतम मिशन’ के जरिए न केवल प्राचीन ज्ञान संरक्षित होगा बल्कि युवाओं और विद्यार्थियों में अध्ययन और शोध के प्रति रुचि भी बढ़ेगी। प्रदेश की योगी सरकार ने इस पहल के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने और वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक बड़ा कदम उठाया है।



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