यूपी में ‘आनंदम’ से बदलेगा स्कूली शिक्षा का स्वरूप

प्रदेश में स्कूली शिक्षा को नए स्वरूप में विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘आनंदम’ पहल बच्चों को अनुभव, कौशल और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ने की दिशा में बड़ा बदलाव लेकर आ रही है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह द्वारा शुरू की गई इस पहल में कक्षा 6, 7 और 8 के विद्यार्थियों के लिए 10 बैगलेस दिवस लागू किए गए हैं, जिनके माध्यम से छात्र किताबों की पढ़ाई तक सीमित न रहकर कौशल, संस्कृति और केस स्टडी आधारित सीख प्राप्त करेंगे। इस कार्यक्रम में शैक्षिक भ्रमण, प्रयोग, कला, विज्ञान, स्थानीय उद्योगों से परिचय और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ शामिल की गई हैं।

‘आनंदम मार्गदर्शिका’ के निर्देश जारी:
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा तैयार की गई ‘आनंदम मार्गदर्शिका’ के आधार पर प्रदेश के सभी 75 जिलों के बीएसए को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य बच्चों को आनंदपूर्ण, अनुभवात्मक और कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ना है, ताकि विद्यार्थी पुस्तकों के पन्नों तक सीमित न रहें बल्कि जीवन की परिस्थितियों को भी समझ सकें।

वास्तविक जीवन से सीखने पर जोर:
इस कार्यक्रम के अंतर्गत बैगलेस दिवसों में विद्यार्थी बिना बैग के स्कूल आएंगे और शैक्षिक भ्रमण, प्रयोग, कला-शिल्प, वैज्ञानिक गतिविधियों, खेलों तथा प्राकृतिक अन्वेषण जैसी गतिविधियों में भाग लेंगे। इस दौरान बच्चे पहली बार केस स्टडी भी करेंगे, जिससे वे वास्तविक जीवन की स्थितियों का विश्लेषण करना सीखेंगे। यह पहल बच्चों में तर्क क्षमता, अवलोकन कौशल, रचनात्मकता और सीखने के नए तरीकों को बढ़ावा देगी।

कौशल विकास की मजबूत नींव:
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उन कौशलों से जोड़ना है जो भविष्य में उन्हें व्यावसायिक रूप से सक्षम बना सकें। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों को विभिन्न हुनर सीखने, श्रम की गरिमा को समझने और आत्मनिर्भरता विकसित करने में मदद करेगा। इसके माध्यम से विद्यार्थी स्थानीय उद्योग-व्यवसायों के कामकाज को भी करीब से जानेंगे, जिससे ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘ODOP’ की अवधारणाओं को मजबूत आधार मिलेगा।

SCERT की गतिविधियों की सूची:
SCERT के निदेशक डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कला-संस्कृति-इतिहास तथा स्थानीय उद्योग-व्यवसाय के क्षेत्रों में गतिविधियों की विस्तृत सूची तैयार की गई है। इन गतिविधियों में विशेषज्ञों, कारीगरों, अभिभावकों और समुदाय की भूमिका को भी जोड़ा गया है, ताकि विद्यार्थी सीधे वास्तविक अनुभव प्राप्त कर सकें। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी योजना भी तैयार की गई है।

बच्चों में होगा आत्मविश्वास और संस्कृति का ज्ञान:
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि यह पहल बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और संस्कृति के प्रति गहरा जुड़ाव विकसित करेगी। विभिन्न स्मारकों, ऐतिहासिक स्थलों, संग्रहालयों और स्थानीय विरासत से रूबरू होकर बच्चों में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी और उनका दृष्टिकोण व्यापक होगा।

बच्चों के सीखने के प्रमुख आयाम:

  1. कौशल और अनुभव आधारित शिक्षा: विद्यार्थी प्रयोग, अवलोकन, विश्लेषण और तर्क के माध्यम से सीखेंगे।
  2. स्थानीय उद्योग और कला से जुड़ाव: बच्चे क्षेत्रीय कलाकारों, कारीगरों और उद्योगों के कार्यों को जानेंगे, जिससे स्थानीय उत्पादों की समझ बढ़ेगी।
  3. श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता: विद्यार्थी श्रम का महत्व समझेंगे और भविष्य से जुड़े व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।
  4. सांस्कृतिक जागरूकता: ऐतिहासिक धरोहर और संस्कृति पर आधारित गतिविधियों से बच्चों में इतिहास का गहरा ज्ञान विकसित होगा।
  5. समुदाय-स्कूल साझेदारी: हर गतिविधि में समुदाय और अभिभावकों की भागीदारी से छात्र वास्तविक जीवन के अनुभवों को सीधे समझ सकेंगे।


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यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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