यूपी में भाजपा ने 14 नए जिलाध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने इस बार जातीय संतुलन साधने पर विशेष ध्यान दिया है, जिसमें 7 सामान्य वर्ग, 6 पिछड़ी जाति और 1 अनुसूचित जाति से जिलाध्यक्ष शामिल किए गए हैं। इन 14 में से 5 पुराने नामों पर फिर से विश्वास जताया गया है। जलशक्ति मंत्री स्वातंत्र्य देव सिंह के गृह जिले जालौन से उर्विजा दीक्षित (Urvija Dixit) और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के जिले कौशांबी में धर्मराज मौर्या (Dharmaraj Maurya) को दोबारा जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अलीगढ़ जिला में कृष्णपाल सिंह (Krishanpal Singh), अलीगढ़ महानगर से राजीव शर्मा (Rajeev Sharma) और फिरोजाबाद में उदय प्रताप सिंह (Uday Pratap Singh) को भी पुनः जिलाध्यक्ष बनाया गया है। फतेहपुर में दागी जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल को हटाते हुए उनके स्थान पर अन्नू श्रीवास्तव को नियुक्त किया गया है।
14 नए जिलाध्यक्षों में जातीय गणित मजबूत किया गया: पार्टी के संगठनात्मक फेरबदल में इस बार जातीय समीकरण को प्रमुखता से रखा गया है। इससे पहले 17 मार्च को 98 संगठनात्मक जिलों में से 70 जिलाध्यक्षों की घोषणा हो चुकी थी। नए बदलाव के साथ कुल 84 जिलाध्यक्ष अब तक घोषित किए जा चुके हैं। इनमें 53 जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त हुए हैं, जबकि 31 को दोबारा मौका मिला है। सामान्य वर्ग से 45, अनुसूचित जाति से 7 और पिछड़ी जाति से 32 जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं। इनमें से 4 कायस्थ, 21 ब्राह्मण, 5 वैश्य और ठाकुर समाज से 13 प्रतिनिधि शामिल हैं।
फतेहपुर के विवादित जिलाध्यक्ष को हटाने की पृष्ठभूमि: फतेहपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल पर 9 महीने पहले गंभीर आरोप लगे थे। बांदा के भाजपा नेता अजित कुमार गुप्ता (Ajit Kumar Gupta) ने शिकायत दी थी कि मुखलाल ने जिलाध्यक्ष बनवाने के नाम पर 50 लाख रुपए पार्टी फंड में जमा कराने के लिए लिए, लेकिन जमा नहीं किए। दोनों की कथित बातचीत का ऑडियो भी सामने आया था, जिसमें पैसों और गिफ्ट में गाड़ी लेने की बात सुनी गई थी। इस शिकायत को बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल (Sunil Bansal) को भेजा गया था। पार्टी की ओर से कारण बताओ नोटिस भी जारी हुआ और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
एसपी से बहस वाला वीडियो भी बना था विवाद की वजह: कुछ महीने पहले फतेहपुर में मकबरा बनाम मंदिर विवाद के दौरान मुखलाल पाल का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे एसपी अनूप सिंह (Anup Singh) को कड़े शब्दों में बोलते दिखे थे। उन्होंने कहा था कि यह मुलायम सिंह की सरकार नहीं है कि आप गोली चलवा देंगे। वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने इसे लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Imran Masood) ने आरोप लगाया कि भाजपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ पुलिस ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। वहीं सपा ने विधानसभा में इस मुद्दे पर हंगामा भी किया।
जिन जिलों में बदलाव हुए, उसके पीछे के कारण: हापुड़ में बदलाव का कारण: निवर्तमान जिलाध्यक्ष नरेश तोमर का स्थानीय जनप्रतिनिधियों से विवाद बढ़ गया था। पार्टी ने उन्हें हटाकर खटीक समाज की कविता माधरे को जिलाध्यक्ष बनाया है।
बाराबंकी में नया जातीय समीकरण सेट: अरविंद मौर्या के खिलाफ माहौल बन रहा था। यहां कुर्मी समाज की बड़ी आबादी को देखते हुए राम सिंह वर्मा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
मेरठ में कार्यशैली से नाराजगी: शिवकुमार राणा दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके थे। लगातार शिकायतें मिलने पर पार्टी ने उन्हें हटाकर हरवीर लाल पाल को मौका दिया है।
झांसी महानगर में स्थानीय विरोध: हेमंत परिहार के खिलाफ कई शिकायतें पार्टी नेतृत्व तक पहुंचीं। इसके बाद उनकी जगह सुधीर सिंह को जिम्मेदारी दी गई।
हमीरपुर में निषाद समीकरण पर फोकस: सुनील पाठक का स्थानीय विधायकों से विवाद था। निषाद समाज की अच्छी आबादी को देखते हुए शकुंतला निषाद को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
जौनपुर में प्रजापति समाज को प्रतिनिधित्व: यहां पुष्पराज सिंह के खिलाफ लगातार विरोध था। काशी क्षेत्र में प्रजापति समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए अजीत प्रजापति को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
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