लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस 2026 का किया शुभारंभ

लखनऊ (Lucknow, Uttar Pradesh) में आयोजित छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कृषि क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कृषि को उत्पादन से आगे बढ़ाकर उत्पादकता, लाभप्रदता और अंततः समृद्धि की दिशा में ले जाया जाए। इस दिशा में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

A group of officials and dignitaries at a ceremony where a man in traditional attire receives an award and a large check, indicating support for agriculture or farming initiatives.

कृषि विकास के लिए व्यापक रोडमैप:
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने किसानों को समृद्ध बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे लाभकारी और स्थायी बनाना आवश्यक है। कृषि क्षेत्र में विकास तभी संभव है, जब तकनीक, परंपरा और नीतियों का समन्वय किया जाए।

‘लैंड इज लैब’ की अवधारणा पर जोर:
मुख्यमंत्री ने ‘लैब टू लैंड’ की पुरानी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए ‘लैंड इज लैब’ की नई सोच पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अब खेत ही नवाचार की प्रयोगशाला बनेंगे, जहां किसान अपने अनुभवों और नई तकनीकों के माध्यम से बेहतर परिणाम हासिल कर सकेंगे। इससे कृषि में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को सीधे लाभ पहुंचेगा।

सीमित संसाधनों में बेहतर प्रदर्शन:
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की कृषि क्षमता का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य में सीमित कृषि योग्य भूमि होने के बावजूद खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह किसानों की मेहनत, योजनाबद्ध प्रयासों और प्रभावी नीतियों का परिणाम है कि कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

तकनीक से बदलेगी कृषि की तस्वीर:
मुख्यमंत्री ने आधुनिक तकनीकों के उपयोग को कृषि के भविष्य के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक के जरिए खेती को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाया जा सकता है। इन तकनीकों के माध्यम से फसलों की निगरानी, रोगों की पहचान और उत्पादन का पूर्वानुमान संभव होगा, जिससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

आत्मनिर्भरता और खाद्य सुरक्षा पर जोर:
मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक हो गई है। उन्होंने कहा कि जब तक किसान समृद्ध नहीं होगा, तब तक देश के विकास की कल्पना अधूरी रहेगी।

प्राकृतिक खेती को बताया समाधान:
कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। साथ ही यह पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है।

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रिपोर्टर: अनुज कुमार

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