दिल्ली और हाथरस जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए उन्नाव रेप पीड़िता ने कहा कि वह बच गई, इसलिए उसे जिंदा रहते हुए सजा दी जा रही है। पीड़िता का कहना है कि उसे और उसके परिवार को लगातार खतरे का डर सताता रहा है। इसी बीच इस मामले में दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) से जमानत मिलने के फैसले ने पीड़िता की चिंता और बढ़ा दी है। पीड़िता का आरोप है कि ताकतवर लोग उसके परिवार और गवाहों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, क्योंकि पहले भी उसके मामले में कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिन्होंने उसके जीवन को पूरी तरह बदल दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला:
मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) की जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को अपील पर अंतिम सुनवाई पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की। अदालत का कहना था कि अपील लंबित रहने के दौरान आरोपी को कुछ शर्तों के साथ राहत दी जा सकती है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
जेल से बाहर आना अभी बाकी:
हालांकि जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सिंह सेंगर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। पीड़िता के पिता की हत्या के मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी। इस मामले में भी उन्होंने जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर 28 दिसंबर को फैसला सुनाया जाना है। यदि इस मामले में भी जमानत मिल जाती है, तभी उनके जेल से बाहर आने की संभावना बनेगी।
जमानत पर कड़ी शर्तें:
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने जमानत देते समय कई शर्तें लगाई हैं। आदेश के मुताबिक कुलदीप सिंह सेंगर जमानत अवधि के दौरान दिल्ली नहीं छोड़ सकेंगे। उन्हें पीड़िता के 5 किलोमीटर के दायरे में जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और हर सोमवार को संबंधित थाने में हाजिरी लगानी होगी। अदालत ने यह भी साफ किया कि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी।
फैसले के वक्त पीड़िता की स्थिति:
जब अदालत यह फैसला सुना रही थी, उस समय पीड़िता दिल्ली में कोर्ट के बाहर मौजूद थी। फैसले की खबर मिलते ही वह भावुक हो गई और रोने लगी। पीड़िता ने कहा कि अदालत ने भले ही दूरी बनाए रखने की शर्त रखी हो, लेकिन उसे असली खतरा आरोपी के समर्थकों से है। उसका कहना है कि वे लोग किसी भी तरह से उसके परिवार और गवाहों तक पहुंच सकते हैं।
गवाहों की सुरक्षा पर सवाल:
पीड़िता का आरोप है कि उसके मामले में जिन गवाहों ने बयान दिए थे, उनकी सुरक्षा पहले ही हटा ली गई है। अधिकतर गवाह उन्नाव (Unnao) में रहते हैं और अब उनके पास कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जमानत के इस फैसले के बाद गवाहों में भी डर का माहौल बन गया है। पीड़िता का कहना है कि बिना सुरक्षा के गवाहों और परिवार के लिए खतरा और बढ़ गया है।
बीते घटनाक्रम का असर:
पीड़िता ने बताया कि जिस अतीत से वह गुजरी है, उसने उसके पूरे जीवन को प्रभावित किया है। बार-बार सामने आने वाली कानूनी प्रक्रियाएं, सुरक्षा को लेकर चिंता और अब जमानत का फैसला, इन सबने मानसिक दबाव और बढ़ा दिया है। पीड़िता का कहना है कि उसे न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है, लेकिन उसे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
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