लखनऊ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC (University Grants Commission) के नए नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद स्वर्ण समाज से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल देखने को मिला। कोर्ट के इस फैसले को लेकर समाज के लोगों ने इसे राहत भरा कदम बताया और सार्वजनिक रूप से अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। लोगों का कहना है कि यह फैसला शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के लिहाज से अहम है।

मिठाई बांटकर जाहिर की खुशी:
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्वर्ण समाज के लोगों ने एकत्र होकर एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और फैसले का स्वागत किया। लोगों का कहना था कि लंबे समय से UGC के नए नियमों को लेकर असमंजस और नाराजगी थी, ऐसे में कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने से उनकी बात को बल मिला है। मिठाई बांटकर लोगों ने आपसी एकजुटता और संतोष का इजहार किया।
कोर्ट के फैसले का स्वागत:
स्वर्ण समाज के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को न्यायपूर्ण बताया। उनका कहना है कि UGC के नए नियमों को बिना व्यापक चर्चा और सहमति के लागू करने की कोशिश की जा रही थी, जिससे कई वर्गों में असंतोष था। कोर्ट द्वारा इस पर रोक लगाना यह दर्शाता है कि संवैधानिक प्रक्रिया और सभी पक्षों की सुनवाई आवश्यक है।
केंद्र सरकार और UGC को नोटिस:
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC (University Grants Commission) को नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होने के बाद अब सरकार और आयोग को अपने पक्ष और नियमों के औचित्य को अदालत के सामने रखना होगा। समाज के लोगों का कहना है कि नोटिस जारी होना इस बात का संकेत है कि मामला गंभीर है और कोर्ट इसे पूरी गंभीरता से देख रही है।

नए नियमों पर अस्थायी रोक:
सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि अगली सुनवाई तक वर्ष 2012 के UGC रेगुलेशन ही लागू रहेंगे। इससे शिक्षा संस्थानों, छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों को अस्थायी राहत मिली है। लोगों का कहना है कि 2012 के नियम लंबे समय से लागू हैं और सभी को उनकी जानकारी है।
19 मार्च को अगली सुनवाई:
मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है। इस तारीख को सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और UGC की दलीलों को सुनेगी। स्वर्ण समाज के लोगों का कहना है कि वे इस सुनवाई पर भी नजर बनाए रखेंगे और उम्मीद करते हैं कि कोर्ट सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला देगी।
आगे भी विरोध की चेतावनी:
स्वर्ण समाज से जुड़े लोगों ने साफ कहा कि यदि भविष्य में सरकार अपनी मनमानी करती है और ऐसे नियम लागू करने की कोशिश करती है जो समाज या शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं हैं, तो वे इसका विरोध करेंगे। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना उनका अधिकार है और जरूरत पड़ने पर वे फिर से संगठित होकर आवाज उठाएंगे।
कानूनी प्रक्रिया में भरोसा:
लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें देश की न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया यह निर्णय इसी भरोसे को मजबूत करता है। उनका मानना है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले सभी संबंधित पक्षों की राय और प्रभाव का मूल्यांकन जरूरी है, ताकि किसी वर्ग के साथ अन्याय न हो।
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