रिपोर्टर: प्रदीप शर्मा
यूजीसी (UGC) एक्ट के विरोध में उत्तर प्रदेश में सोमवार को व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में छात्र, युवा, सामाजिक संगठन और विभिन्न वर्गों के लोग सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार से यूजीसी नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की। विरोध के दौरान नारेबाजी, प्रतीकात्मक प्रदर्शन और इस्तीफों ने इस आंदोलन को और तेज कर दिया।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस विरोध को आने वाले समय में और गहराने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यूजीसी एक्ट आम जनता और खासकर युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है, इसलिए इसे वापस लेना जरूरी है।
रायबरेली (Raebareli) में चूड़ियां भेजकर जताया विरोध:
रायबरेली (Raebareli) में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजकर अपना आक्रोश जताया। उनका कहना था कि जनता ने जिन नेताओं को वोट देकर विधायक और मंत्री बनाया, वे अब यूजीसी एक्ट के विरोध से बच रहे हैं। ऐसे नेताओं को राजनीति छोड़कर घर के कामों तक सीमित हो जाना चाहिए। इस प्रतीकात्मक विरोध ने जिले में खासा ध्यान खींचा।
वाराणसी (Varanasi) में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन:
वाराणसी (Varanasi) जिला मुख्यालय के पास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। प्रदर्शन में छात्र, युवा और कई सामाजिक संगठनों के लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में यूजीसी नियमों को वापस लेने की मांग की और नारेबाजी के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, हालांकि भीड़ का आकार और नारों की तीव्रता ने प्रशासन का ध्यान खींचा।

सोनभद्र (Sonbhadra) में जिला मुख्यालय का घेराव:
सोनभद्र (Sonbhadra) में सवर्ण समाज के लोगों ने जिला मुख्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यूजीसी एक्ट समाज के एक वर्ग को निशाना बनाता है और इससे असमानता बढ़ेगी। घेराव के दौरान नारेबाजी हुई, लेकिन किसी तरह की अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली।
फर्रुखाबाद (Farrukhabad) और प्रतापगढ़ (Pratapgarh) में नारेबाजी:
फर्रुखाबाद (Farrukhabad) में प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए—“प्रधानमंत्री गद्दी छोड़ो… अभी तो ये अंगड़ाई है… आगे और लड़ाई है।” वहीं प्रतापगढ़ (Pratapgarh) में केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई और “सवर्ण एकता जिंदाबाद” के नारे लगाए गए। दोनों जिलों में विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया।
कुमार विश्वास का सोशल मीडिया तंज:
यूजीसी मुद्दे पर कवि कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा। उन्होंने लिखा—“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं… मेरा रोंया-रोंया उखाड़ लो राजा।” उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और बहस का विषय बन गई।
गोंडा (Gonda) से विधायक की तीखी प्रतिक्रिया:
गोंडा (Gonda) से भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने यूजीसी मुद्दे पर फेसबुक पोस्ट के जरिए तीखा हमला बोला। उन्होंने इतिहास के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए लिखा कि जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के अत्याचारों को अतीत की बात कहकर भुला दिया जाता है, वहीं भारतीय समाज के एक वर्ग को लगातार ऐतिहासिक अपराधी बताकर वर्तमान में प्रतिशोध का शिकार बनाया जा रहा है।
भाजपा नेताओं के इस्तीफे शुरू:
यूजीसी एक्ट के विरोध में भाजपा नेताओं द्वारा इस्तीफा देने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। भाजपा युवा मोर्चा नोएडा महानगर के जिला उपाध्यक्ष राजू पंडित ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि यूजीसी जैसा कानून सवर्ण जाति के बच्चों के भविष्य के लिए घातक है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में युवाओं और सामाजिक संगठनों में इस कानून को लेकर नाराजगी है।
रायबरेली (Raebareli) में मंडल अध्यक्ष का इस्तीफा:
रायबरेली (Raebareli) में भाजपा किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष (सलोन ब्लॉक) श्याम सुंदर त्रिपाठी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि यूजीसी द्वारा सवर्ण बच्चों के विरोध में लाए गए कानून से नाराज होकर उन्होंने यह कदम उठाया है। उनका कहना था कि सवर्ण जाति के बच्चों के साथ पहले से ही जातिगत राजनीति होती रही है और इस कानून से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
बरेली (Bareilly) में सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा:
बरेली (Bareilly) के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे की वजह यूजीसी का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई को बताया। इस इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
बढ़ता विरोध और सियासी संकेत:
प्रदेशभर में हो रहे इन प्रदर्शनों, सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं और इस्तीफों से साफ है कि यूजीसी एक्ट को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जब तक इस कानून को वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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