‘मैं न कोई मॉडल हूं और न ही कोई संत… मैं सिर्फ एक एंकर और एक्ट्रेस थी। संतों ने महिला होने के बावजूद मेरा अपमान किया। आनंद स्वरूप को पाप लगेगा।’
यह कहकर हर्षा रिछारिया रो पड़ती हैं। प्रयागराज के महाकुंभ नगर में पेशवाई के रथ पर बैठने के बाद चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने खुद को 10 बाई 10 के टेंट में कैद कर लिया है। 24 घंटे से वह इसी टेंट में हैं। हर्षा मध्य प्रदेश के भोपाल की रहने वाली हैं।
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मीडिया से बातचीत में हर्षा ने कहा- अब मुझे डर लग रहा है। मेरे ऊपर लग रहे आरोपों से मैं त्रस्त हूं, परेशान हूं। अब मैं महाकुंभ मेला छोड़कर चली जाऊंगी। मैं पूरे महाकुंभ में रहने के लिए यहां आई थी। मैं सिर्फ महाराज जी की भक्त हूं। कैलाश आनंद के विचारों से प्रभावित होकर उनके साथ आई थी।

टीआरपी के तड़पती मीडिया के बारे में क्या ही कहना? विश्व में 195 देश हैं और भारतीय मीडिया की स्थिति 181 में से 151 नंबर अटकी हुई है। मेन स्ट्रीम मीडिया में सुधार की आवश्यकता है। समस्याओं और जनसरोकार के सवालों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। इसी मीडिया ने हर्षा को भी खूब दिखाया। एक संत की असली सुंदरता उसका आध्यात्मिक संस्कार है लेकिन हर तरफ़ हर्षा के शारीरिक सुंदरता की बात की गई। हर्षा भी इस बात को लेकर मीडिया से नाराज़ हैं उनका कहना है कि शाही सवारी में उस वक्त मेरे अलावा बहुत से गृहस्थ लोग भी बैठे हुए थे। जिनका अपना परिवार है, बच्चे हैं, मां-बाप हैं, लेकिन मुझे लगता है कि मीडिया ने मुझे टारगेट किया हुआ था। सिर्फ हमारे निरंजनी अखाड़े में गृहस्थ लोग नहीं थे। अलग-अलग अखाड़ों की शाही सवारी में गृहस्थ लोग बैठे थे। ये कोई विवाद का मुद्दा नहीं था। अगर किसी बच्चे से गलती होती है, तो उसे समझाना चाहिए। लेकिन उसे विवादों में घेरना, नाम खराब करना गलत है। उसे पहले साध्वी का टाइटल देना, फिर मॉडल का टाइटल दे देना। यह बहुत गलत बात है।

हर्षा खुद को एक्टर और एंकर बताती हैं। साध्वी के रूप में सामने आने के बाद हर्षा की पुरानी तस्वीरों खूब वायरल किया गया जिसपर हर्षा का कहना है कि मेरी पुरानी तस्वीरों में कुछ भी गलत नहीं है। मैंने कुछ भी नहीं छिपाया। मैंने सभी को खुलकर बताया कि मैं एक्टर थी, एंकर थी। अब उससे बाहर निकलकर धर्म से जुड़ गई हूं। मैंने खुद ही सबको बताया। मेरा खुद का कंटेंट वायरल करना, गलत बात है। जिस प्रोफेशन में थी, वहां छोटे कपड़े पहनना, जींस-टॉप पहनना चलता है। भारत में बड़े-बड़े शहरों में लड़कियां हर तरह के कपड़े पहन रही हैं। लेकिन मुझे मेरी मर्यादा का हमेशा ध्यान रहा है। मैंने कभी नॉनवेज खाते हुए फोटो-वीडियो सामने नहीं आई। सिर्फ कपड़ों को लेकर मेरा चरित्र जस्टिफाई किया जा रहा है। ऐसे में यह गलत बात है, समस्त नारी जाति का अपमान किया जा रहा है। अगर कपड़ों की बात कर रहे हैं, तो महाकुंभ में नागा साधु भी हैं। फिर आप नारी को ही क्यों ट्रोल कर रहे हैं। एक बेटी को बचाना चाहिए। लेकिन लोग मुझे ट्रोल कर रहे हैं। गलत कमेंट कर रहे हैं।

हर्षा का कहना है कि मैंने सोचा था कि पूरे कुंभ मेले में रहूंगी। इसी मंशा से यहां आई थी। अब मुझे कैद होकर रहना पड़ रहा है। जिस उद्देश्य के साथ आई थी, वो पूरा नहीं हो पा रहा। लोगों से और उनके सवालों से बचना पड़ रहा है। मुझे अब फील हो रहा है कि मैंने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया। मुझे टारगेट किया जा रहा है। अब मैं यहां नहीं रह पाऊंगी, क्योंकि खुलकर सांस नहीं ले पा रही। इससे अच्छा है कि मैं यहां से चली जाऊं। मैं कुंभ छोड़कर जाने का प्लान कर चुकी हूं।

उनका कहना है कि खुद को बड़ा साधु-संत बताने वाले अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं। जो उनकी बेटी समान है, उस पर कमेंट करने वालों को शर्म आनी चाहिए। आपने ऐसा कमेंट किया कि एक बेटी महाकुंभ छोड़ने को मजबूर हो रही है। वो महाकुंभ, जो लाइफ में एक बार आएगा। इस आनंद स्वरूप को पुण्य नहीं, पाप जरूर लगेगा। इतना मैं बोलकर जा रही हूं।